….इस डॉक्टर को सरकार के आदेश की नहीं है कोई परवाह, शासन के आदेश को दिखाता है ठेंगा

रवि गोयल, जांजगीर-चाँपा। सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के कामकाज को लेकर अक्सर ही कई तरह की खबरें आते रहती है. ताजा मामला स्वास्थ्य विभाग का है जहां पदस्थ एक डॉक्टर शासन के आदेश को लगातार ठेंगा दिखा रहा है और जिम्मेदार मौन हैं.

हम बात कर रहे हैं जांजगीर-चांपा जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मालखरौदा में पदस्थ चिकित्सक एवं पूर्व खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ केएल उरांव की. सरकार ने 23 अगस्त को आदेश जारी करते हुए राजधानी रायपुर सहित प्रदेश भर के 7 चिकित्सा अधिकारियों का तबादला किया था, जिनमें एक नाम डॉ केएल उरांव का भी है. तबादला आदेश में साफ तौर से इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि जिनका तबादला किया गया है उन्हें 15 दिन के भीतर संबंधित स्थानांतरित स्थल में कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य है.

लेकिन उरांव तबादला स्थल रवाना नहीं हुए तो सीएमएचओ ने 11 सितबंर को उरांव को पत्र लिखते हुए निर्देश दिया कि वे डॉ सिदार को बीएमओ पद की जिम्मेदारी सौंप दें और उन्हें रिलीव किया जा सके. बावजूद इसके डॉ उरांव ने सीएमएचओ के आदेश का पालन नहीं किया, उन्होंने न तो डॉ सिदार को कार्यभार सौंपा और न ही खुद स्थानांतरित स्थल के लिए रवाना हुए. मामले में सीएमएचओ ने एक सप्ताह बाद कार्रवाई करते हुए उरांव को एकतरफा कार्यमुक्त कर दिया. बताया जा रहा है कि इस आदेश के बाद उरांव ने डॉ सिदार को चार्ज देने की बजाय पत्थलगांव से तबादले पर आए एक नए डॉ  को चार्ज देकर पांच दिन की छुट्टी पर चले गए हैं.

आपको बता दें इससे पहले भी उरांव का अप्रेल 2017 में जांजगीर-चांपा के मालखरौद से बिलासपुर जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के पद पर तबादला किया गया था. बताया जा रहा है कि बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में अपनी आमद दे दी और लेकिन वहां रेडियोलॉजिस्ट का पद नहीं था जिसकी वजह से किसी और पद पर कार्य भी किया. इस दौरान उन्होंने  आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटया. जहां उन्होंने अपनी याचिका में इस बात का हवाला दिया कि बिलासपुर अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद नहीं है. मामले में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि जहां पद खाली हैं वहां तबादला किया जाए.

हाईकोर्ट के इस आदेश का हवाला देते हुए उरांव ने बिलासपुर से वापस जांजगीर-चांपा के लिए 1 सितंबर 2018 को रिलीव भी करा लिया और जिले में आकर 4 सितंबर 2019 को सीएमएचओ कार्यालय में अपनी आमद दे दी. वहीं उच्च न्यायालय के आदेश के 4 माह बाद स्वास्थ्य विभाग की तंद्रा टूटी और अवर सचिव ने 7 दिसंबर 2018 को नया आदेश जारी किया. जिसमें 12 अप्रैल को बिलासपुर के लिए जारी तबादला आदेश को निरस्त करते हुए उरांव का तबादला गरियाबंद अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के पद पर कर दिया.

लेकिन डॉ उरांव ने शासन के इस आदेश की भी धज्जियां उड़ाते हुए स्थानांतरित जगह गरियाबंद न जा कर मालखरौद में ही वर्तमान आदेश तक जमे रहे. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के पूरे सिस्टम पर ही सवालिया निशान लग रहा है कि कैसे एक डॉक्टर आदेश की धज्जियां उड़ाकर विभाग को जीभ चिढ़ाता रहा और विभागीय अधिकारी खामोश देख रहे हैं.

 

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