चला जाता हूँ मैं अपनी धुन में…धड़कते दिलों के तराने किशोर कुमार का आज है जन्मदिन. जानिए क्या है रायपुर से कनेक्शन.

विधि अग्निहोत्री, रायपुर। मुसाफ़िर हूँ यारों ना घर है ना ठिकाना मुझे चलते जाना है बस चलते जाना……ऐसा ही एक मुसाफिर रहे आभास गांगुली जिसे दुनिया किशोर कुमार के नाम से जानती है. खंडवा के इस लोकप्रिय गायक, अभिनेता, निर्देशक का आज जन्मदिन है. यूं ही हंसता गुनगुनाता चंचल सा व्यक्ति जिसके गाये गाने आम लोग अपने जीवन से जोड़ पाते हैं. जिसकी शरारतों के किस्से बहुत है. आज रॉक और ईडीएम म्यूजिक के दौर में हम सभी किशोर को गुनगुनाना भुले नहीं है. हर मूड के हिसाब से किशोर के गाने फिट बैठते हैं  चाहे उदास हों, रोमेंटिक हो, या फिर मस्ती का मूड हो किशोर के गानों का अथाह भंडार है आपके लिए.

जन्मदिन विशेष पर आईये आज डूबकी लगा ही आते हैं  किशोर नाम के इस सागर में क्या पता कुछ नगमों से रुबरु होकर दिन अच्छा गुज़र जाए. 4 अगस्त 1929 को मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में जाने माने वकील कुंजीलाल के घर एक बालक का जन्म हुआ और नाम रखा गया आभास गांगुली. किसे पता था बचपन में बेसुरा यह बालक बड़ा होकर घर-घर में लोगों के दिल-ओ-ज़ुबान पर जा बसेगा. किशोर को बचपन में लोग फटा बांस कहते थे. पैर में चोट लगने पर किशोर ना जाने किस तरह रोए कि किसी करिश्मे की तरह उनकी आवाज़ खुल गई.

आवाज़ के इस जादूगर को दूध जलेबी बड़ी पसंद थी और रसगूल्ले खाने में तो शायद ही कोई इन्हे पछाड़ पाया होगा. किशोर को खाने का बहुत शौक था वो खुद तो खाते ही साथ में दोस्तों को भी खूब खिलाया करते. इसी चक्कर में उन पर कॉलेज की कैंटिन में पाँच रूपये बारह आने का उधार हो गया था. किशोर कैंटिन में बैठकर यही गाना गाया करते. 1958 में आई फिल्म चलती का नाम गाड़ी में उनके इसी गाने को लिया गया जो उन्होने कैंटीन में बैठकर गाया था.

बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि किशोर कुमार की शुरुआत की कई फ़िल्मों में मोहम्मद रफी ने किशोर कुमार के लिए अपनी आवाज दी. मोहम्मद रफ़ी ने फ़िल्म ‘रागिनी’ और ‘शरारत’ में किशोर कुमार को अपनी आवाज उधार दी. किशोर कुमार सहगल साहब के बहुत बड़े फैन थे और उन्ही की तरह गाया करते. एक दिन वरिष्ठ संगीतकार एसडी बर्मन ने उन्हे सहगल साहब को कॉपी करने के बजाय अपनी स्टाइल में गाने की सलाह दी. बस फिर क्या था चल पड़ा किशोर का जादू. किशोर ने आशा भोसले के साथ कई सुपरहीट गाने दिए. आशा ने किशोर के साथ काम करते हुए कहा था कि इनके साथ गाने के पहले मुझे बहुत तैयारी करनी पड़ती है वे हर गाने में अलग तरह की आवाज़ निकाल अपना स्पेशल टच देते हैं और उनसे मुकाबला करने के लिए मुझे उसी अंदाज़ में जवाब देना पड़ता है.

 

किशोर की आवाज की पूरी दुनिया कायल थी. लोग उन्हे स्टेज पे गाता हुआ देख ऐसे खुश होते जैसे भगवान के दर्शन हो गए हों. ऐसे ही एक पल का साक्षी बना था रायपुर. 10 नवंबर 1979 को किशोर कुमार अपनी आवाज का जादू बिखरने रायपुर पहुँचे थे. उन्हे सुनने के लिए रायपुर के कोटा स्टेडियम में एक लाख की भीड़ जमा हुई थी. आलम ऐसा था कि शो कि टिकट लाखों रुपयों तक बिकी थी. इसी राशि से महाराष्ट्र मंडल की नींव रखी गई थी. जो आज रायपुर के लोगों को आर्थिक, सामाजिक रूप से मजबूत करने में मदद कर रहा है. उस वक्त जब रायपुरवासियों को किशोर कुमार के रायपुर पहुँचने की ख़बर लगी तो आश्रम चौक से सरस्वती नगर थाने तक बड़ी संख्या में भीड़ जमा हो गई. आयोजन समिति से रसूखदार और नेता मुफ्त पास के लिए शिफारिश करने लगे. छात्र नेताओं ने सड़के जाम कर दी और कहा था कि अगर हमें फ्री पास नहीं मिला तो हम आंदोलन कर देंगे. किशोर को जब मामले का पता चला तो उन्होंने कहा- “अरे भोले ….. मुझे तो तुम छिपते-छिपाते ही ले जाओ, नहीं तो तुम्हारे शहरवाले मुझे परेशान करने लगेंगे”. जब लोगों को फ्री पास नहीं मिले तो वे सड़क पर उतर आए. ऐसी स्थिति में किशोर को रायपुर एयरपोर्ट से भिलाई लाया गया. और पूरी रात संस्था के सदस्यों ने कोटा स्टेडियम की पहरेदारी की. आखिरकार शाम 7 बजे पीछे के रास्ते से किशोर को मंच पर लाया गया. पूरा स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था. गाने सुनते ही सड़क पर बैठे छात्र नेता भी स्टेडियम के सामने आकर उनकी आवाज का लुफ्त उठाने लगे.

अपने अलबेले और अलग अंदाज में गायकी के दम पर किशोर ने 8 फिल्मफेयर पुरस्कार जीते. अमर प्रेम, अराधना, गाइड, कटी पतंग और डॉन जैसी फिल्मों में उनके गाने सुनकर तो उनके दीवाने हो बैठे. किशोर के कुछ सदाबहार गाने हैं जो आज भी ज़हन से उतरते नहीं जैसे घूँघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं, कहीं दूर जब दिन ढ़ल जाए, जिंदगी का सफ़र, मेरे मेहबूब कयामत होगी. किशोर के गाए कई गानों को आज के सिंगर रिमिक्स बना कर गाते हैं. 58 साल की उम्र में खंडवा के किशोर की आवाज़ ख़ामोश हो गई. किशोर बड़े गर्व से बताया करते की वो खंडवा से हैं और उनकी इच्छा के अनुसार ही उनका अंतिम संस्कार भी खंडवा में ही किया गया. अपने फिल्मी करियर में किशोर ने इस कदर लोगों के दिल में जगह बनाई की दुनिया से रूख़स्ति के 25 साल बाद भी किशोर अपने उसी अंदाज़ में भारतीयों के दिलों में राज कर रहे हैं.

 

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