’भारत माता के अनमोल रत्न थे डॉ. अम्बेडकर’ : महापरिनिर्वाण दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री ने डॉ. अम्बेडकर को दी श्रद्धांजलि

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रायपुर.मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कल 6 दिसम्बर को भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने आज यहां जनता के नाम जारी अपने संदेश में कहा है कि डॉ. अम्बेडकर भारत माता के अनमोल रत्नों में से थे, जिन्होंने समाज की अंतिम पंक्ति के करोड़ों लोगों को संगठित कर उनमें स्वाभिमान और आत्मविश्वास जागृत कर उन्हें विकास की मुख्य धारा से जोड़ा।

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डॉ. रमन सिंह ने कहा-विलक्षण प्रतिभा के धनी स्वर्गीय डॉ. अम्बेडकर ने कठोर परिश्रम करते हुए अपनी जीवन यात्रा में कई गौरवशाली उपलब्धियां हासिल की। वह स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री भी थे। उनकी अध्यक्षता में भारतीय संविधान के निर्माण के लिए प्रारूप समिति का गठन किया गया था। डॉ. अम्बेडकर ने अत्यंत कठोर परिश्रम कर संविधान का प्रारूप तैयार करने में अपनी ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनके द्वारा रचित भारतीय संविधान के जरिए देश में लोकतंत्र लगातार पुष्पित और पल्लवित हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा-छत्तीसगढ़ सरकार ने भी समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए स्वर्गीय डॉ. अम्बेडकर के सपनों को साकार करने के लिए लगातार कई सार्थक कदम उठाए हैं। इनमें सरगुजा और बस्तर आदिवासी विकास प्राधिकरण, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण और ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण शामिल हैं। इन प्राधिकरणों में जनप्रतिनिधियों से परामर्श कर विकास के अनेक नये फैसले लिए जाते है और उन पर तत्परता से अमल भी किया जाता है। सरस्वती साईकिल योजना शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की बालिकाओं को हाईस्कूल में 9वीं कक्षा में प्रवेश लेने पर निःशुल्क साईकिल देने का प्रावधान किया गया है।
डॉ. रमन सिंह ने कहा-इस योजना के लागू होने के लगभग 14 वर्ष के भीतर राज्य के हाई स्कूलों में बालिकाओं की दर्ज संख्या 63 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 97 प्रतिशत तक पहुंच गई है। प्रदेश के नक्सल पीड़ित आदिवासी बहुल क्षेत्रों के 11वीं और 12वीं के प्रतिभावान बच्चों को शिक्षा की बेहतर सुविधा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत सभी पांच संभागीय मुख्यालयों में प्रयास आवासीय विद्यालय खोले गए हैं, जिनमें बालक-बालिकाओं को नियमित पढ़ाई के साथ पीएमटी, पीईटी और उच्च तकनीकी शिक्षा संस्थाओं में दाखिले के लिए निःशुल्क कोचिंग की सुविधा भी दी जा रही है।

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