भीमा मंडावी को घटनास्थल से 4 किमी पहले किया गया था अलर्ट, पर वो नहीं रुके और हो गया नक्सली ब्लास्ट- डीएम अवस्थी

सत्यपाल सिंह राजपूत, रायपुर. डीजीपी डीएम अवस्थी ने प्रेसवार्ता कर दन्तेवाड़ा नक्सल हमले की जानकारी देते हुए बताया कि विधायक भीमा मंडावी चुनाव प्रचार करने के लिए निकले थे. चुनाव प्रचार खत्म कर बचेली से कुआकोंडा जा रहे थे. स्थानीय थाना प्रभारी ने उन्हें उस रास्ते पर जाने से मना करते हुए अलर्ट भी किया था. लेकिन भीमा मंडावी नहीं माने और अपने तीन गाड़ियों के साथ निकल गए और कुछ देर बाद कुआकोंडा से 4 किलोमीटर पहले नक्सली ब्लास्ट हो गया. जिसमें उनकी मौत हो गई और 4 जवान शहीद हो गए.

डीएम अवस्थी ने बताया कि दंतेवाड़ा के कुआकुंडा थाना क्षेत्र के नकुलनार-बचेली में नक्सली हमला हुआ है. भीमा मंडावी की गाड़ी बुलेट प्रूफ था इसके बावजूद वाहन के परखच्चे उड़ गए. इस पूरे घटना को किस तरीके से अंजाम दिया गया है इसकी पूरी जांच की जाएगी. उन्होंने ये भी बताया कि बस्तर लोकसभा के अतिनक्सल प्रभावित क्षेत्रों के कुछ मतदान केंद्रों को दूसरे जगह पर भेजा जा रहा है. जिससे मतदान प्रभावित न हो. इसके अलावा अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है. जो चुनाव में अलग से जिम्मा संभालेंगे.

आगे उन्होंने बताया कि भीमा मण्डावी अपने 3 गाड़ियों के सुरक्षा काफिले के साथ दंतेवाड़ा की डीआरजी के 50 जवानों का बल 25 बाइक में सवार होकर प्रचार-प्रसार कर रहे थे. वो सुबह नेतापुर, तन्नेनार, मेटापाल समेत कई इलाकों में रैली की. फिर दोपहर 1 बजे दंतेवाड़ा पार्टी कार्यालय वापस पहुंच गए थे. इसके बाद भीमा ने डीआरजी के सुरक्षा प्रभारी को कहा कि आज का प्रचार कार्यक्रम समाप्त हो गया है अब यह सुरक्षा वापस ले जाए. दोपहर भोजन के बाद वे दोबारा अपनी 3 सुरक्षा गाड़ियों के साथ रवाना होकर सबसे पहले किरन्दुल पार्टी कार्यालय पहुंचकर वहाँ कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर बचेली आ रहे थे.

बचेली थाना प्रभारी शील आदित्य सिंह ने भीमा मण्डावी को 3.50 बजे फोन कर बचेली से कुआंकोण्डा मार्ग पर आरओपी और पर्याप्त सुरक्षा नहीं होने से उस मार्ग पर जाने से मना किया गया. मंडावी से इस दौरान लगभग 1 मिनट 59 सेकण्ड बात हुई. इसके बावजूद भीमा अपने गाड़ी और सुरक्षा वाहनों के साथ उस रास्ते की ओर चले गए. जहां कुआकोण्डा से 4 किमी पहले नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट कर दिया. 

नक्सली हमले में विधायक भीमा मण्डावी के साथ उनके ड्राइवर, आरक्षक दंतेश्वर मौर्य, 3 पीएसओ प्र. आर. छगन कुलदीप, प्र.आर. रामलाल ओयामी, आर. सोमडू कवासी शहीद हो गए.

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