रेत माफियाओं के दबाव में सरपंच ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में सामने आई सच्चाई

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रायपुर- बिलासपुर जिले के बेलगहना चौकी के छतौना निवासी सरपंच संतकुमार पैकरा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. उसके पास से सुसाइड नोट मिला है, जिसमें रेत माफियाओं के दबाव की वजह से आत्महत्या किए जाने का जिक्र किया गया है. सुसाइड नोट में मृत सरपंच ने लिखा है कि वह रेत माफियाओं के दबाव के चलते आत्महत्या करने पर मजबूर है. 

छतौना के सरपंच संतकुमार पैकरा बीते बुधवार की रात घर से बिना बताए कहीं चला गया. परिजन पूरी रात उसकी खोजबीन करते रहे. सुबह ग्रामीणों ने उसकी लाश गांव के ही करीब तालाब के किनारे एक पेड़ पर लटकती पाई. सूचना पुलिस और परिजनों को दी गई. पंचनामा के दौरान पुलिस को सरपंच के पास से डेढ़ पेज का सुसाइट नोट बरामद हुआ, जिसमें रेत माफियाओं के दबाव का जिक्र करते हुए आत्महत्या किए जाने की बात लिखी है. मृतक के परिजनों की माने तो वह रेत माफियाओं के आतंक से भयभीत था. आत्महत्या के बाद सुसाइड नोट गायब किए जाने की शंकाओं के बीच एक सुसाइड नोट घर पर भी छोड़ रखा था.

मृतक सरपंच ने सुसाइट नोट में रेत माफियाओं से लेन-देन का ब्यौरा लिखते हुए रेत माफियाओं के नामों का भी उल्लेख किया है. सुसाइट नोट में पैकरा ने जिन लोगों का नाम लिखा है, उनमें हरीशचंद सोनी, अजय ठाकुर, वरूण सिंह, अनवर खान, सुमन सिंह समेत कई नामों शामिल हैं. जांच में यह बात सामने आ रही है कि सुसाइड नोट में जिन रेत माफियाओं के नामों का जिक्र किया गया है, उनका संबंध कई राजनीतिक दलों से है. मृतक के चचेरे भाई धनमान सिंह ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया है कि उसके भाई ने आत्महत्या नहीं की है, बल्कि सुनियोजित तरीके से उसकी हत्या की गई है. बताया जा रहा है कि सरपंच संतकुमार पैकरा पर दबाव डालकर ही बुधवार की रात ग्राम पंचायत की बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में पंचायत सचिव से लेकर तमाम पदाधिकारी भी मौजूद थे. बैठक में आम सहमति से रेत घाट शुरू किए जाने के प्रस्ताव को दबाव के बीच पारित कराया गया था. बेलगहना के चौकी प्रभारी हेमंत सिंह ने कहा है कि पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है. मौके से मिले सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है. 

अवैध रेत खनन रोकने ही खदान का संचालन पंचायत से लेकर सीएमडीसी को दिया गया था

पिछले दिनों विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रेत खनन का संचालन पंचायतों से लेकर सीएमडीसी को दिए जाने का ऐलान किया था. सरकार ने दलील दी थी कि पंचायतों के हाथों संचालन होने की स्थिति में रेत का अवैध खनन किया जा रहा है. रेत माफिया दबाव डालकर पंचायतों से प्रस्ताव पारित करा रहे हैं, लिहाजा इस पर रोक लगाने के लिए सीएमडीसी को संचालन का अधिकार दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि बीते पांच सालों में पंचायतों को दिए गए अधिकतम राजस्व में 25 फीसदी ज्यादा राजस्व सरकार देगी.  बिडिंग के आधार पर लोडिंग फिक्स किया जाए. दूसरे राज्यों में हो रही रेत तस्करी रोकी जाएगी. कलेक्टर को नई खदाने अधिक से अधिक संख्या में खोलने के निर्देश दिए जाएंगे, जिससे अवैध खनन रोका जा सके.

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