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रायपुर। संस्कृति विभाग में लंबे समय से कुछ अन्य विभाग के लोग प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी बनकर लाभ ले रहे हैं. इसे लेकर विभाग के भीतर भी कई बार जमकर विवाद होते रहा है. इन विवादों की वजह से संस्कृति विभाग सवालों के घेरे में रहा है. ताजा मामला सांसद रमेश बैस की बहू को संस्कृति विभाग से हटाकर उन्हें उनके मूल विभाग में भेजने के लिए की गई अनुशंसा है. इस अनुशंसा को लेकर विभाग में अंदरखाने सवाल उठने लगे हैं.
दरअसल शासन के निर्देशों के तहत गैर शिक्षकीय कार्यों में लगे शिक्षा विभाग के लोगों की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें मूल विभाग में भेजने को कहा है. अब इसी निर्देश के तहत प्रतिनियुक्ति पर संस्कृति विभाग में सहायक संचालक पद पर पदस्थ सांसद रमेश बैस की बहू को प्रतिनियुक्ति समाप्त करने की अनुशंसा संस्कृति विभाग संचालक ने की है.
इसी अनुशंसा के साथ संस्कृति विभाग सवालों के घेरे में आ गया है. क्योंकि संचालक ने सिर्फ मुक्ति बैस को हटाने की अनुशंसा की है. जबकि प्रतिनियुक्ति पर ही काम कर रही पूर्णश्री राउत को नहीं. पूर्णश्री राउत का भी मूल विभाग शिक्षा विभाग ही है. पूर्णश्री राउत भी बीते कई सालों से शिक्षा विभाग को छोड़ संस्कृति विभाग में अधिकारी की तौर पर पदस्थ हैं. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि संस्कृति संचालक ने उन्हें हटाने की अनुशंसा क्यों नहीं की? आपको बता दें कि पूर्णश्री राउत प्रदेश के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव एमके राउत की पत्नी हैं.
इसके साथ ही वन विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए प्रतापचंद पारख को भी हटाने में आज तक संस्कृति विभाग कामयाब नहीं हो सका. हालांकि प्रताप पारख ने वन विभाग से संस्कृति विभाग में संविलियन करा लिया है. उन पर फर्जी तरीके से संविलियन कराने का आरोप लगा है और यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. ऐसे में संस्कृति विभाग में प्रतिनियुक्ति को लेकर चल रहे खेल में विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं.