दिल्ली में म्यांमार की तरह 7 की तीव्रता से भूकंप(Delhi earthquake) आने की ‘भविष्यवाणी’ करने वाले विकास कुमार ने दावा किया है कि उन्होंने एक मशीन विकसित की है जो जलजले का पूर्वानुमान लगा सकती है. हालांकि, ’12वीं पास इस वैज्ञानिक’ का यह दावा गलत साबित हुआ. विकास की भविष्यवाणी से उत्पन्न पैनिक को रोकने के लिए राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) को हस्तक्षेप करना पड़ा. एनसीएस ने स्पष्ट किया कि यह दावा निराधार है और बताया कि विकास ने बिना किसी अनुमति के ऐसा दावा किया है, जबकि भूकंप का पूर्वानुमान लगाना अभी तक संभव नहीं है.
क्या किया था दावा
विकास जियो सेंसिंग ने अपने लेटरहेड पर एक बयान जारी करते हुए 31 मार्च को दिल्ली और नेपाल में संभावित भूकंप की चेतावनी दी है. बयान में कहा गया है कि 31 मार्च 2025 को सुबह 7:15 बजे भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली (ANDSS) से दिल्ली से उत्तर-दक्षिण दिशा में 20 डिग्री पर 100 किलोमीटर की दूरी पर पहला सिग्नल प्राप्त हुआ है. यह भूकंप 3 से 5 मेग्नीट्यूड के बीच हो सकता है. इसके अलावा, भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में 300 किलोमीटर की दूरी पर दूसरा सिग्नल भी मिला है, जो दिल्ली से उत्तर-पूर्व दिशा में 45 डिग्री पर है और इसका मेग्नीट्यूड 5 से 7 के बीच होने की संभावना है. सभी से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें, क्योंकि यह भूकंप 24 घंटे के भीतर आ सकता है. यह जानकारी गणेश नगर पांडव नगर, दिल्ली में स्थापित मशीन से प्राप्त हुई है.
गलत निकला विकास का दावा
विकास द्वारा किया गया दावा असत्य साबित हुआ है. निर्धारित समय के दो दिन बाद भी दिल्ली या नेपाल में कोई भूकंप नहीं आया है. इससे पूर्व भी विकास ने कई ऐसे दावे किए थे जो गलत साबित हुए थे.
कौन हैं विकास?
विकास कुमार ‘विकास जियो सेंसिंग प्राइवेट लिमिटेड’ नामक एक स्टार्टअप के संस्थापक हैं. गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के निवासी विकास का दावा है कि उन्होंने एक ऐसी मशीन विकसित की है जो भूकंप से पहले चेतावनी देने में सक्षम है. 12वीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाले विकास के यूट्यूब चैनल से यह स्पष्ट होता है कि वह भूकंप पर अनुसंधान और अलर्ट सिस्टम के निर्माण में लंबे समय से लगे हुए हैं. उन्होंने बताया कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण वह आगे की पढ़ाई नहीं कर सके, लेकिन भूकंप के विषय पर उनका काम निरंतर जारी रहा है. विकास ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड में अपनी मशीनें स्थापित की हैं, जिनके माध्यम से वह भूकंप की पूर्व चेतावनी देने का दावा करते हैं.
काम आई थी विकास की एक मशीन
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह जानकारी मिली है कि विकास ने उत्तराखंड के सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों से संवाद स्थापित करने के लिए एक संचार प्रणाली विकसित की थी, जिसका उपयोग किया गया.
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NCS का क्या कहना है?
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने इस दावे को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया है. NCS के निदेशक ओपी मिश्रा ने एक बयान में कहा कि विकास कुमार की यह भविष्यवाणी पूरी तरह से निराधार है और इसे किसी भी आधिकारिक मान्यता प्राप्त नहीं हुई है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकास कुमार ने पहले भी कई झूठे दावे किए हैं, जिन्हें पहले ही खारिज किया जा चुका है.
NCS ने विकास कुमार की भविष्यवाणी के तकनीकी पहलुओं पर संदेह व्यक्त किया. उन्होंने बताया कि कुमार ने भूकंप के संकेतों के संदर्भ में 20 डिग्री और 45 डिग्री के कोणों का उल्लेख किया, जो कि निरर्थक प्रतीत होता है. इसके अलावा, उन्होंने यह भी इंगित किया कि कुमार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये कोण किस दिशा, यानी देशांतर या अक्षांश, के संदर्भ में दिए गए हैं.
NCS की सलाह: सतर्कता से बचें, अफवाहों से दूर रहें
NCS ने जनता से अनुरोध किया है कि वे बिना किसी ठोस प्रमाण के आई ऐसी खबरों से भयभीत न हों और अफवाहों पर ध्यान न दें. NCS के अनुसार, भूकंप की सटीक भविष्यवाणी करना असंभव है, और इस तरह की सूचनाएं केवल भ्रम उत्पन्न करती हैं. विकास कुमार की भविष्यवाणी भले ही दिल्लीवासियों में चिंता का कारण बनी हो, लेकिन NCS का कहना है कि इस प्रकार के बिना वैज्ञानिक आधार के दावे केवल अनावश्यक घबराहट फैलाने का काम करते हैं.
दिल्ली में भूकंप के संबंध में जो अफवाहें चल रही थीं, उन्हें NCS ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है. नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे इस प्रकार की बिना प्रमाणित जानकारी पर ध्यान न दें और अपनी सुरक्षा के लिए केवल आधिकारिक सूचनाओं पर निर्भर रहें.
इस संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि भय का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि भूकंप की पूर्वानुमान के लिए विश्वसनीय तकनीकी विधियाँ और वैज्ञानिक आधार उपलब्ध हैं. NCS ने यह स्पष्ट किया है कि ऐसी भविष्यवाणियाँ अवैज्ञानिक और गलत हैं.
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