दिल्ली में ट्रैफिक और प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई वित्त व्यय समिति की बैठक में नजफगढ़ नाले के दोनों किनारों पर दो-लेन सड़क बनाने को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना पर कुल 453.95 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि यह सड़क राजधानी में वैकल्पिक मार्ग तैयार करेगी और कई इलाकों के बीच आवागमन आसान बनाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक दबाव कम करना, यात्रा समय और ईंधन खपत में कमी लाना, वाहनों से होने वाले प्रदूषण और उत्सर्जन को घटाना है।

दिल्ली में परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि नजफगढ़ नाले के दोनों किनारों पर बनने वाली दो-लेन सड़क परियोजना का मुख्य उद्देश्य मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक दबाव कम करना, यात्रा समय और ईंधन खपत घटाना तथा वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, यह परियोजना राजधानी के परिवहन ढांचे को नई दिशा देगी और शहर के भीतर आवागमन को सुगम बनाने के लिए एक वैकल्पिक इंट्रा-सिटी कॉरिडोर के रूप में विकसित होगी। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या कम होने और लोगों को तेज़ एवं आसान यात्रा का लाभ मिलने की उम्मीद है। दिल्ली सचिवालय में आयोजित वित्त व्यय समिति की बैठक में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह भी उपस्थित रहे।

ऐसे बढ़ेगी कनेक्टिविटी

परियोजना की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि नजफगढ़ नाले के दोनों किनारों पर बनने वाली सड़क राजधानी में एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग तैयार करेगी। झटीकरा ब्रिज से छावला ब्रिज तक नाले के बाएं किनारे पर 5.94 किमी लंबी दो-लेन सड़क बनाई जाएगी। छावला से बसईदारापुर तक ड्रेन के दोनों किनारों पर 27.415 किमी लंबाई में सड़क निर्माण होगा। दोनों किनारों को मिलाकर इस हिस्से की कुल लंबाई 54.83 किमी होगी। पूरी परियोजना के तहत कुल विकसित लंबाई 60.77 किमी तय की गई है। सरकार का मानना है कि इस सड़क के बनने से राजधानी में वैकल्पिक इंट्रा-सिटी कॉरिडोर तैयार होगा, जिससे ट्रैफिक दबाव कम होगा और लोगों को तेज़ व सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, यह मार्ग दिल्ली के परिवहन नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक इंट्रा-सिटी कॉरिडोर साबित होगा। यह सड़क निम्न मुख्य मार्गों से जुड़ेगी आउटर रिंग रोड, इनर रिंग रोड, शिवाजी मार्ग, पंखा रोड, यूईआर-2 (एनएच-9 रोहतक रोड कनेक्टिविटी), नजफगढ़ रोड

महत्वपूर्ण कनेक्शन पॉइंट्स:

बसईदारापुर: इनर रिंग रोड से संपर्क

केशोपुर: आउटर रिंग रोड से संपर्क

विकासपुरी: पंखा रोड से संपर्क

ककरोला: नजफगढ़ रोड से संपर्क

धूलसिरस: यूईआर-2 के जरिए एयरपोर्ट और द्वारका एक्सप्रेसवे से सीधा संपर्क

सरकार का कहना है कि इस परियोजना से पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के बीच यात्रा आसान होगी, ट्रैफिक जाम कम होगा और एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए एक नया तेज़ मार्ग उपलब्ध होगा।

इन इलाकों को होगा लाभ

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि नजफगढ़ नाले के किनारे बनने वाली सड़क परियोजना ढांसा से लेकर बसईदारापुर तक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कॉरिडोर बनेगी।

इन प्रमुख इलाकों को होगा लाभ:

उत्तम नगर, विकासपुरी, नजफगढ़, बिजवासन, छावला, गोयला डेयरी, द्वारका, बापरोला, निलोठी, पश्चिम विहार, राजौरी गार्डन और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सहित कई क्षेत्रों में आवागमन आसान होगा।

दिल्ली-हरियाणा कनेक्टिविटी मजबूत:

यह मार्ग गुरुग्राम के सेक्टर-104 और सेक्टर-110 तक संपर्क को भी सुदृढ़ करेगा, जिससे दिल्ली और हरियाणा के बीच यात्रा तेज़ और सुगम होगी।

गांवों को भी मिलेगा सीधा फायदा:

द्वारका एक्सप्रेसवे से जुड़े गालिबपुर, रावता मोड़, दौराला, झुझुली, सारंगपुर, ढांसा, घुम्मनहेड़ा, शिकारपुर, झटीकरा, कांगनहेड़ी और छावला जैसे गांवों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा, जिससे स्थानीय विकास और आवाजाही दोनों में सुधार होगा।

61 किमी लंबी, 7 मीटर चौड़ी बनेगी सड़क

मुख्यमंत्री के मुताबिक इस योजना के तहत नजफगढ़ ड्रेन के किनारे लगभग 61 किमी लंबी और 7 मीटर चौड़ी पक्की सड़क बनाई जाएगी। सड़क के साथ पैदल चलने, दौड़ने और साइकिल चलाने के लिए अलग ट्रैक भी विकसित होगा। द्वारका मेट्रो यार्ड के पास आवाजाही सुगम बनाने के लिए नया पुल बनेगा।

परियोजना में सड़क किनारे हरियाली बढ़ाने के लिए पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। जहां जरूरत होगी वहां नई दीवार बनाई जाएगी और क्षतिग्रस्त दीवारों की मरम्मत होगी। साथ ही स्ट्रीट लाइट, साइन बोर्ड और बारिश के समय जलभराव रोकने के लिए ड्रेनेज सिस्टम भी बनाया जाएगा। पूरी परियोजना पर करीब 453.95 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसमें निर्माण से जुड़े सभी आवश्यक कार्य शामिल हैं।

कब तक पूरा होगा काम

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इस परियोजना को संबंधित तकनीकी समिति और बाढ़ नियंत्रण बोर्ड से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। अब समिति की स्वीकृति के बाद आगे की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। सरकार का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक जरूरी प्रशासनिक मंजूरी मिल जाए, अप्रैल 2026 तक टेंडर प्रक्रिया पूरी हो और मई 2026 तक निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाए।

पूरी परियोजना को नवंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना दिल्ली में सतत, हरित और सुव्यवस्थित परिवहन प्रणाली की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी, जिससे यातायात सुगमता बढ़ेगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और शहरी व ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।

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