महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी लड़की बहिन योजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अनिवार्य e-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं करने के कारण करीब 68 लाख खातों को बंद कर दिया गया है, जिससे योजना के लाभार्थियों की संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। महाराष्ट्र में ‘लाड़की बहिन योजना’ के लाभार्थियों के लिए बड़ी खबर है। सत्यापन के बाद 68 लाख खाते बंद कर दिए गए हैं। अपात्र लोगों को मिल चुकी राशि को वापस नहीं लिया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा है कि अपात्र पाए गए लोगों से पहले से दी गई राशि की वसूली नहीं की जाएगी।
महाराष्ट्र सरकार की मुख्य योजना ‘लाड़की बहिन योजना’ के तहत लगभग 68 लाख खाते बंद कर दिए गए हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लाभार्थियों ने तय समय सीमा से पहले अनिवार्य e-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं की। इसके चलते सक्रिय खातों की संख्या घटकर लगभग 1.75 करोड़ रह गई है।
अधिकारियों के मुताबिक, कुल 2.43 करोड़ खातों में से 68 लाख खातों को निर्धारित समय सीमा तक e-KYC पूरा न करने के चलते निष्क्रिय कर दिया गया। इसके बाद अब सक्रिय खातों की संख्या घटकर करीब 1.75 करोड़ रह गई है। हालांकि, सरकार ने लाभार्थियों को राहत देते हुए e-KYC की अंतिम तारीख 31 मार्च से बढ़ाकर अब 30 अप्रैल कर दी है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि बंद किए गए कुछ खाते दोबारा सक्रिय हो सकते हैं।
नवंबर 2025 से अब तक e-KYC प्रक्रिया की समय सीमा कई बार बढ़ाई जा चुकी है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस समय सीमा विस्तार के बाद बंद खातों की संख्या में बदलाव आ सकता है। बुधवार को एक अधिकारी ने बताया, “कुल 2.43 करोड़ खातों में से लगभग 68 लाख खाते इसलिए बंद कर दिए गए हैं, क्योंकि लाभार्थियों ने तय समय के भीतर अनिवार्य e-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं की।
राज्य सरकार ने यह सत्यापन अभियान तब चलाया, जब उसे शिकायतें मिलीं कि इस योजना के तहत अपात्र लोगों जिनमें पुरुष सदस्य और सरकारी कर्मचारी भी शामिल थे को भी लाभ मिल रहा था। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करती है।
राज्य सरकार हर महीने लाभार्थियों को लगभग 3,700 करोड़ रुपये वितरित करती है, जिसमें प्रत्येक पात्र महिला को 1,500 रुपये मिलते हैं। सक्रिय खातों की संख्या कम होने के कारण, इस खर्च में भी बदलाव आने की उम्मीद है। 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 26,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि 2025-26 में यह राशि 36,000 करोड़ रुपये थी। ‘लाड़की बहिन योजना’ को 2024 के राज्य विधानसभा चुनावों से पहले ‘महायुति’ सरकार द्वारा शुरू किया गया था।
सरकार ने यह फैसला किया है कि जिन लाभार्थियों को अपात्र पाया गया है, उनसे दी गई राशि वापस नहीं ली जाएगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया है कि इस योजना को बंद नहीं किया जाएगा।
राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने साफ किया है कि यह योजना बंद नहीं की जाएगी। साथ ही सरकार ने यह भी कहा है कि अपात्र पाए गए लोगों से पहले से दी गई राशि की वसूली नहीं की जाएगी। यह योजना 2024 विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई थी और राज्य की महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत मानी जा रही है।
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