अनमोल मिश्रा, सतना। राज्य स्तरीय कोल जनजाति विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रामलाल रौतेल शनिवार को शहपुरा बंधा पहुंचे। जहां उन्होंने पीड़ित और बेघर आदिवासियों से मुलाकात की। साथ ही प्रशासन से हर संभव मदद दिलाए का भरोसा दिलाया। दरअसल, 50 सालों से से जमीन पर काबिज आदिवासियों को मंगलवार को बेदखल करते हुए उनके घरों को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया गया था।

रामलाल रौतेल ने कहा कि मुझे सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी मिली कि पचासों सालों से निवासरत आदिवासियों के घरों को वन विभाग ने अवैध कब्जा बताते हुए तोड़ दिया है। इसलिए मैं यहां पर खुद चलकर देखने आया हूं। मेरा मानना है कि वो जनजाति जो सालों से घर बनाकर रह रही है, उनके घरों को वन विभाग ने बेरहमी से अवैध कब्जा बताकर तोड़ दिया।यह सरासर अन्याय है। यहां आकर देखने के ऐसा लगता है कि वन विभाग ने इनके साथ अन्याय किया है।

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रामलाल रौतेल ने कहा, आदिवासी यहां पर 2006 से पहले से बसे हुए हैं। वन विभाग को इन्हे वनाधिकार के तहत पट्टा देना चाहिए था। आदिवासियों ने पट्टे के लिए आवेदन भी दिए थे, लेकिन वन विभाग ने आदिवासियों के आवेदनों को खारिज कर दिया था। जबकि बगल में मंदिर है, जिसे सामूहिक दावे के आधार पर पट्टा दिया गया है। हम मंदिर विरोधी नहीं हैं, हम भी धर्म को मानने वाले लोग हैं। लेकिन यह दोहरा मापदंड क्यों।

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जंगल में बसने वाले आदिवासियों के साथ सरकार और प्रशासन ने दोहरा मापदंड अपनाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार ने कहीं भी आदिवासियों के साथ दोहरा मापदंड नहीं अपनाया है। रही बात इन आदिवासियों को न्याय दिलाने की, जिसके लिए मैं जिला कलेक्टर, सांसद सहित मुख्यमंत्री से बात करूंगा। यहां के पीड़ित आदिवासियों को जमीनों के पट्टे सहित प्रधानमंत्री आवास के अलावा शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।


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