गांधीनगर। गुजरात में विधानसभा चुनावों की आहट के बीच सियासी सरगर्मियां अचानक तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा के अचानक हुए दिल्ली दौरे ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इस हाई-प्रोफाइल दौरे के बाद से ही गुजरात सरकार के मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव और फेरबदल की अटकलें जोरों पर हैं।

गुजरात में अगले वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा आलाकमान के साथ हुई इस उच्चस्तरीय बैठक को चुनावी तैयारियों और प्रशासनिक कसावट से जोड़कर देखा जा रहा है। नेताओं ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सहित शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की है।

राजनीतिक सुगबुगाहट के मुख्य कारण :

मंत्रिमंडल में फेरबदल: चर्चा है कि अपेक्षा के अनुरूप परिणाम न देने वाले मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है।

किसान आंदोलन का मुद्दा: सौराष्ट्र में खेतों के बीच बिजली के खंभे लगाने को लेकर किसान नाराज हैं। सरकार द्वारा मुआवजा और किराया बढ़ाने के बावजूद आंदोलन जारी है, जिस पर आलाकमान से रणनीति पर चर्चा हुई।

केंद्रीय योजनाओं का फीडबैक: केंद्र सरकार की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और गुजरात के विकास मॉडल को लेकर आलाकमान ने नेताओं से विस्तृत रिपोर्ट ली है।

वाइब्रेंट गुजरात 2027: जनवरी 2027 में आयोजित होने वाले वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन और मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री के आगामी विदेश दौरों की रूपरेखा पर भी केंद्रीय नेतृत्व से सहमति ली गई है।

चुनावी वर्ष में प्रवेश करने से ठीक पहले गुजरात के शीर्ष नेतृत्व की दिल्ली में यह मौजूदगी साफ संकेत देती है कि पार्टी सत्ता विरोधी लहर को दूर करने और सरकार की छवि को मजबूत करने के लिए जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकती है।


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