Lalluram Desk. भगवान शंकर की पूजा में श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजन विधि और नियमों का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी होता है। भक्त भोलेनाथ को खुश करने के लिए जल, बेलपत्र, फल, प्रसाद और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाते हैं। लेकिन कई बार जानकारी के अभाव में ऐसी छोटी गलतियां हो जाती हैं, जिनसे पूजा का विधान प्रभावित हो सकता है।

शंकर मंदिर जाएं तो जलाधारी पर फल, प्रसाद, दीपक या अन्य सामग्री रखने से बचना चाहिए। श्रद्धा के साथ पूजा के इन नियमों का पालन करने से मंदिर की धार्मिक गरिमा बनी रहती है, और पूजन भी सही तरीके से संपन्न होता है।

जलाधारी क्यों होती है खास

शिवलिंग के जिस आधार भाग से अभिषेक के दौरान चढ़ाया गया जल बाहर की ओर प्रवाहित होता है। उसे जगह को जलाधारी कहा जाता है। भोलेनाथ की पूजा में इसका बहुत खास महत्व होता है। भक्त शिवलिंग पर जल और अन्य अभिषेक सामग्री चढ़ाते हैं, जो इसी रस्ते से प्रवाहित होती है। ऐसे में जलाधारी पर फल, प्रसाद या दूसरी वस्तुएं रख देने से जल के प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो सकती है, इसलिए पूजा के दौरान इस जगह को खाली रखना चाहिए।

जलाधारी पर न रखें फल और प्रसाद

1. शंकर मंदिर में महादेव को फल, भोग या अन्य खाद्य सामग्री अर्पित करते समय उसे शिवलिंग की जलाधारी पर सीधे नहीं रखना चाहिए।
2. केला, सेब, पपीता, नारियल या कोई सा भी फल हो इन्हें जलाधारी पर रखने से बचना चाहिए।
3. दीपक दिया-बत्ती या दूसरी पूजन सामग्री को जलाधारी पर रखने की बजाय मंदिर में निर्धारित स्थान पर ही रखना चाहिए।

बहुत बार श्रद्धालु भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए फल या प्रसाद शिवलिंग के पास रख देते हैं। पूजा में भाव के साथ सही विधि का पालन करना भी बहुत महत्वपूर्ण है। भोलेनाथ को जल और बेलपत्र अर्पित करना शंकर जी की आराधना का सरल माध्यम माना गया है। यदि फल, भोग या दीपक चढ़ाना हो तो उसे जलाधारी से अलग मंदिर में बने निर्धारित जगह पर रखना चाहिए। इससे मंदिर की पवित्रता और पूजन की व्यवस्था बनी रहती है।

भगवान शंकर को भोलेनाथ कहा जाता है। उनकी पूजा में दिखावे से अधिक श्रद्धा और भक्ति को महत्व दिया जाता है, इसलिए मंदिर में पहुंचने पर पूजन सामग्री अर्पित करते समय जल्दबाजी न करें और वहां की परंपरा व व्यवस्था का ध्यान रखें।

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