लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मत्स्य विभाग में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन में कथित लापरवाही और अनियमितताओं को लेकर योगी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है. मत्स्य निदेशक एनएस रहमानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. उनके साथ मत्स्य विभाग की अधिकारी श्वेता सिंह, आकाशदीप, राजेंद्र और खुर्शीद आलम पर भी कार्रवाई की गई है. यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर की गई है.

शासन स्तर पर जारी आदेश के मुताबिक एनएस रहमानी के खिलाफ कई गंभीर आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं. इनमें महानिदेशक मत्स्य की अनुमति के बिना सोनभद्र स्थित रिहंद जलाशय के मत्स्याखेट ठेके की स्वीकृति जारी करना शामिल है. इसके अलावा प्रयागराज के गुलरिहा जलाशय और बहराइच के गण्डौर जलाशय के ठेकों को भी कथित तौर पर निर्धारित प्रक्रिया और अनुमोदन के बिना स्वीकृति दिए जाने का मामला सामने आया है.

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विभागीय जमीन के संरक्षण में भी लापरवाही

जांच में लखनऊ के चिनहट स्थित मत्स्य विभाग की करीब 0.733 हेक्टेयर भूमि के अमल-दरामद, दाखिल-खारिज और सीमांकन की कार्रवाई समय से नहीं कराए जाने का भी आरोप है. शासन के मुताबिक उच्चाधिकारियों के निर्देश के बावजूद कार्रवाई नहीं किए जाने से विभागीय भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति उत्पन्न होने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रही.

PMMSY में लाभार्थियों के भुगतान और निगरानी पर सवाल

रहमानी पर वाराणसी मंडल में उप निदेशक मत्स्य के पद पर तैनाती के दौरान प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी लापरवाही का आरोप है. प्रारंभिक जांच में लाभार्थियों को किए गए भुगतान का समय पर सत्यापन नहीं करने तथा योजनाओं की निगरानी और सुपरविजन में कमी की बात सामने आई है. इन्हीं आरोपों के आधार पर शासन ने माना कि एनएस रहमानी प्रथम दृष्टया दोषी हैं. निलंबन अवधि में उन्हें मंडलायुक्त सहारनपुर मंडल से संबद्ध किया गया है.

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चार अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई

मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने बताया कि श्वेता सिंह, आकाशदीप, राजेंद्र और खुर्शीद आलम के खिलाफ भी PMMSY के क्रियान्वयन में कथित लापरवाही और अनियमितताओं के संबंध में कार्रवाई की गई है. मंत्री ने कहा है कि प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है और मामले की विस्तृत जांच जारी है. मंत्री के मुताबिक जांच में यदि अन्य अधिकारी भी दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को भ्रष्टाचार, लापरवाही अथवा अनियमितता के मामले में बख्शा नहीं जाएगा. शासन ने एनएस रहमानी के खिलाफ विभागीय जांच के लिए मंडलायुक्त लखनऊ मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है. जांच अधिकारी को आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर एक माह के भीतर रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.