Rajasthan News: जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) हॉस्पिटल में भर्ती 26 वर्षीय युवक शुभम ने ब्रेन डेड होने के बाद तीन लोगों को नया जीवन दिया। भरतपुर जिले के भैसा गांव निवासी शुभम, जो एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ था, 17 नवंबर को ब्रेन डेड घोषित किया गया। इसके बाद उसके परिजनों ने अंगदान के लिए सहमति दी। शुभम के लिवर और दोनों किडनियों को जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया।

मॉर्निंग वॉक के दौरान हुआ था हादसा
शुभम, पुत्र स्व. महेश चंद गोयल, 13 नवंबर की सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान एक सड़क हादसे में बुरी तरह घायल हो गया था। प्रारंभिक इलाज अलवर में हुआ, लेकिन गंभीर हालत के चलते उसे एसएमएस हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में रेफर किया गया। डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
परिवार को अंगदान के लिए किया प्रेरित
एसएमएस हॉस्पिटल के डॉक्टर मनीष अग्रवाल और डॉ. चित्रा सिंह ने बताया कि शुभम का इलाज कई विशेषज्ञों ने किया, लेकिन जब स्थिति गंभीर बनी रही, तो 17 नवंबर की शाम उसे ब्रेन डेड घोषित किया गया। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने शुभम की मां, हेमलता, और परिवार को अंगदान के लिए प्रेरित किया। परिवार ने सहमति देते हुए शुभम के अंगों को दान करने का निर्णय लिया।
लिवर जोधपुर एम्स भेजा, किडनियां एसएमएस में प्रत्यारोपित
शुभम की दोनों किडनियां एसएमएस हॉस्पिटल में भर्ती दो पुरुष मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं, जो 30 वर्ष से कम उम्र के थे। वहीं, शुभम का लिवर जोधपुर एम्स में भेजा गया और वहां एक मरीज को नया जीवन दिया गया।
हार्ट दान नहीं हो सका
डॉ. मनीष अग्रवाल ने बताया कि शुभम के हार्ट को दान करने के लिए सोटो (स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन) और नोटो (नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन) के जरिए डोनर का इंतजार किया गया। लेकिन कोई रिसीवर उपलब्ध न होने के कारण हार्ट का दान नहीं हो सका।
अंगदान में एसएमएस का 33वां मामला
एसएमएस हॉस्पिटल में यह अंगदान का 33वां मामला है। डॉक्टरों के अनुसार, शुभम अपने पिता की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहा था। वह प्राइवेट सेक्टर में काम करता था और अपनी मां व छोटे भाई के साथ रहता था। शुभम के इस महान कदम ने तीन परिवारों को उम्मीद की नई रोशनी दी।
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