Rajasthan News: जयपुर. प्रदेश में कोचिंग सेंटर्स से जुड़े छात्रों की आत्महत्या के मामलों पर गंभीरता दिखाते हुए सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट में कहा कि कोचिंग सेंटर्स के लिए विधानसभा में विधेयक पेश किया जाएगा. सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता (एजी) राजेंद्र प्रसाद ने अदालत को जानकारी दी कि कोचिंग सेंटर्स के नियमित संचालन के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया जारी है. उम्मीद है कि आगामी विधानसभा सत्र में इसे पेश कर दिया जाएगा.

अदालत का रुख और अगली सुनवाई की तारीख
सरकार का पक्ष सुनने और इसे रिकॉर्ड पर लेने के बाद जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस वीके भारवानी की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी तय की है. उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई में अदालत ने कहा था कि जब तक कोचिंग सेंटर्स के लिए कोई नियामक कानून नहीं बनता, तब तक केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार पंजीकरण किया जाए.
कोचिंग सेंटर्स की जिलेवार सूची अदालत में पेश
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में संचालित कोचिंग सेंटर्स की जिलेवार सूची अदालत में पेश की गई. दरअसल, कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले कई छात्रों की आत्महत्या को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में स्वप्रेरणा से मामले का संज्ञान लिया था और इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया था.
महाधिवक्ता ने अदालत में क्या कहा ?
महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार कोचिंग सेंटर्स के संचालन के लिए सभी आवश्यक बिंदुओं पर काम कर रही है. इस विधेयक का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली को नियमित करना और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. महाधिवक्ता के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने सुनवाई को 10 फरवरी तक टाल दिया.
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