Donald Trump On Indian Students: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारतीय छात्रों के अमेरिका में पढ़ने और फिर अपने देश में जाकर बिजनेस करने को लेकर एक बार फिर दर्द छलका है। ट्रंप ने कहा कि भारतीय यहां में पढ़ते हैं और अपने देश में अरबपति बन जाते हैं। अब अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारतीय ग्रेजुेट्स के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे “गोल्ड कार्ड” नागरिकता के साथ भारतीय ग्रेजुएट्स को नौकरी पर रख सकती है।
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ट्रंप ने कहा कि भारत, चीन, जापान से लोग अमेरिका आते हैं। वे लोग अमेरिका के हार्वर्ड या द व्हार्टन स्कूल ऑफ फाइनेंस में पढ़ाई करते हैं। उन्हें नौकरियां मिलती हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि क्या वे अमेरिका में रह सकते हैं या नहीं। इसके कारण पढ़ाई करके अपने देश चले जाते हैं, वे कंपनियां खोलते हैं और अरबपति बन जाते हैं।
ऐसे लोगों को अमेरिका में रोकने के लिए ट्रंप ने अमेरिकी कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे “गोल्ड कार्ड” नागरिकता के साथ भारतीय ग्रेजुएट्स को नौकरी पर रख सकती है।
राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि कई कंपनियों ने इस मामले को लेकर उनसे शिकायत की थी कि वे इन्हें काम पर रखने में असमर्थ होती हैं, और भारतीय छात्र अपने देश जाकर बड़ी कंपनियां खोलकर अरबपति बन जाते हैं। ट्रंप ने कहा, “मुझे कई कंपनियों से शिकायत मिली है कि वे लोगों को नौकरी पर रखने के लिए बाहर जाती हैं, लेकिन उन्हें नौकरी पर नहीं रख पातीं… आप जानते हैं कि वे क्या करती हैं? वे भारत वापस चले जाते हैं, या वे उस देश में वापस चले जाते हैं जहां से वे आए थे, और वहां एक कंपनी खोलते हैं, और अरबपति बन जाते हैं।
क्या है गोल्ड कार्ड
दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने 25 फरवरी को एक नई “गोल्ड कार्ड” योजना की घोषणा की थी। यह अप्रवासियों को 5 मिलियन डॉलर (50 लाख रुपये) में बेची जाएगी और इसके माध्यम से अप्रवासियों को अमेरिकी नागरिकता लेने में आसानी होगी। सीधे शब्दों में कहे तो अमेरिकी नागरिकता के लिए सौदा करना। पैसे दीजिए और नागरिकता लीजिए। यह गोल्ड कार्ड, ग्रीन कार्ड का प्रीमियम वर्जन होगा और इससे न केवल ग्रीन कार्ड के खास अधिकार मिलेंगे बल्कि अमीर अप्रवासियों को अमेरिका में निवेश करने और नागरिकता प्राप्त करने का अवसर भी मिलेग। ये गोल्ड कार्ड अमेरिका के 35 साल पुराने निवेशक वीजा की जगह लेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिन इसका ऐलान करते हुए कहा था, “हम एक गोल्ड कार्ड बेचने जा रहे हैं. हम उस कार्ड की कीमत लगभग 5 मिलियन डॉलर रखने जा रहे हैं। राष्ट्रपति के मुताबिक, इस नए इनीशियेटिव का मकसद अमेरिका में हाई नेट-वर्थ वाले लोगों को आकर्षित करना है, जबकि सरकार की कोशिश है कि इससे ज्यादा से ज्यादा रेवेन्यू बनाया जाए।
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