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सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बेला त्रिवेदी ने एक मामले की सुनवाई करते हुए एक बहुचर्चित टिप्पणी की आरोपी महिला के वकील ने कहा कि उनकी क्लाइंट का वजन बहुत अधिक है. इसलिए उन्हें हिरासत से राहत मिलनी चाहिए और उन्हें जेल से निकाला जाए. वकील ने कहा कि उनकी क्लाइंट बीमार हैं और कई समस्याओं से पीड़ित हैं. जस्टिस बेला त्रिवेदी ने पूछा कि क्या ऐसी दलील को बेल के लिए स्वीकार किया जा सकता है या नहीं? जस्टिस बेला त्रिवेदी ने इस पर कहा ‘उन्हें कस्टडी में ही रहने दिया जाए ताकि उनका वजन कम हो सके.’
जस्टिस त्रिवेदी ने मई 2024 में बेल के एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को बेल के मामलों की सुनवाई नहीं करनी चाहिए. जस्टिस बेला त्रिवेदी ने कहा, ‘बेल के मामलों में सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए. यह मेरी राय है.बेल के केसों को हाई कोर्ट पर ही छोड़ देना चाहिए. ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट तो बेल कोर्ट बन गया है.’
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सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसकी आलोचना की है. X यूजर्स ने लिखा कि जस्टिस की ऐसी व्यक्तिगत टिप्पणी ठीक नहीं थी; उन्हें केस पर बात करनी चाहिए, किसी आरोपी के शरीर को लेकर ऐसी टिप्पणी करना असंवेदनशीलता है और उनके न्यायिक कार्य से बाहर की बात है.
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