रविंद्र कुमार भारद्वाज, रायबरेली. एनटीपीसी से निकलने वाला नाला गंगा नदी को मैला करने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी खतरा बन गया है. लंबे समय हो रहे प्रदूषण पर अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने संज्ञान लिया है. अधिकारियों की एक टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और हकीकत जानी.

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बता दें कि एनटीपीसी के नाले में कोयले से युक्त काला पानी और आवासीय परिसर से निकलने वाला कीचड़ शामिल है, जो गंगा को दूषित कर रहा है. स्थानीय लोग समय-समय पर इस मुद्दे को उठाते रहे हैं, लेकिन शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. अब एनजीटी के हस्तक्षेप के बाद जिला गंगा समिति के परियोजना निदेशक संजय कुमार ने अपनी टीम के साथ शहावपुर अरखा गांव के पास गंगा नदी का दौरा किया. यहां नाले का गंदा पानी कई किलोमीटर तक गंगा की सतह पर फैला दिखा. टीम ने मौके की वीडियोग्राफी की, जिसकी रिपोर्ट एनजीटी को भेजी जाएगी. वहीं एनटीपीसी के जनसंपर्क अधिकारी ऋषभ शर्मा ने टीम के दौरे की जानकारी से इंकार किया.

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निरीक्षण के दौरान टीम ने कोटरा बहादुरगंज, कल्याणी, तीर का पुरवा, खरौली और गोकर्ण गंगा घाट का भी जायजा लिया. यहां ठोस कचरे और पॉलीथीन के ढेर गंगा में बहते पाए गए. बाबा जमादार मंदिर के पास कचरे का ढेर और बहादुरगंज ग्राम पंचायत के प्राथमिक विद्यालय के मुख्य द्वार पर गंदगी का अंबार देखा गया, जो बच्चों और ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर रहा है. गांवों से निकलने वाली गंदी नालियां भी सड़कों के रास्ते गंगा में मिल रही थीं.

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