सुधीर सिंह राजपूत, मीरजापुर. विकसित भारत योजनान्तर्गत रेलवे स्टेशन परिसर सहित मुख्य गेट को सौंदर्यीकरण कर चमकाएं जाने की कवायद को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं. आस-पास के दुकानदार ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए मुख्य गेट पर रेलवे के पिलर से अपने को खतरा बताते हुए कहा कि उससे उनकी रोजी-रोटी चली जाएगी.

स्टेशन रोड के रहने वाले राजकुमार, सोनू पुत्रगण कृपाशंकर और लक्ष्मी देवी ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वह लोग
पिछले दो दशक से ज्यादा समय से दुकान मय जमीन स्टेशन रोड पर चाय और नाश्ता की दुकान चलाते आ रहे है. जिनका मूल रूप से किराया मांग पुस्तिका के मूल नम्बर 1-2 के रजिस्टर्ड इन्द्राज है. वह नियमित रूप से नगर पालिका परिषद मीरजापुर और बिजली का बिल, गृहकर, जलकर भी जमा करते आएं हैं. जहां उन्हें हक और अधिकार हासिल है. दुकानदारों का आरोप है कि रेलवे मनमानी तौर पर आवंटित किए गए भूमि में जबरदस्ती पिलर गाड़कर उनके अधिकार को समाप्त कर देने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है. जिससे उनक पूरा परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएगा और आवंटित किए गए भूमि की नवैयत बदल जाएगी.
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दुकानदारों के मुताबिक रेलवे की इस मनमानी से वह लोग हैरान परेशान हैं. उन्होंने जिलाधिकारी सहित रेलवे के अधिकारियों से मांग किया है कि उनको अलॉट हुए भूमि मय दुकान के अगल-बगल भूमि पर रेलवे विभाग द्वारा विस्तारवादी नीति को रोकते हुए उनको एलाट हुए भूमि के अगल-बगल पिलर का निर्माण होने से रोका जाना जरूरी एवं न्यायसंगत है. उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश के तहत नगर पालिका परिषद की ओर से अलॉट किए गए भूमि और दुकान के अगल-बगल किसी भी पीलर को लगाने से रोकने के लिए रेलवे विभाग, मीरजापुर को आदेश किए जाने की गुहार लगाई है.
उक्त भूमि रेलवे के क्षेत्र में है- अधिकारी
वहीं दूसरी ओर रेलवे के अधिकारियों ने कहा है कि रेलवे का जो भी कार्य हो रहा है वह उनके अपने क्षेत्र, भूमि में हो रहा है. रेलवे की मंशा न तो किसी को उजाड़ने की है और ना ही किसी की भूमि पर दखल करने की रही है, जहां तक पिलर का मामला है वह रेलवे के अपने भूमि में कराया जा रहा है, पिलर का निर्माण रेलवे के अधिकार क्षेत्र की भूमि में ही होगा, ताकि किसी को कोई परेशानी न होने पाएं.
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