Waqf Amendment Bill: केंद्र की मोदी सरकार (modi government) आज लोकसभा में बहुप्रतिक्षित वक्फ संशोधन बिल 2024 को पेश करने जा रही है। प्रश्नकाल के बाद दोपहर 12 बजे माइनॉरिटी अफेयर्स मंत्री किरेन रिजिजू लोकसभा में वक्फ बिल (Waqf Bill) को रखेंगे। इसके बाद सदन में इस पर 8 घंटे तक बहस होगी। इसमें से NDA को 4 घंटे 40 मिनट दिए गए हैं, बाकी वक्त विपक्ष को मिला है। बहस के दौरान, रिजिजू सदन को संबोधित करेंगे और फिर बिल को पारित करने के लिए वोटिंग कराएंगे।
बिल को रोकने के लिए कांग्रेस समेत सभी विपक्षी पार्टियों रूपरेखा तैयार की है। संसद में कांग्रेस समेत सभी पार्टियों के सांसद बिल का विरोध करेंगे। इस दौरान एनडीए सांसदों के साथ तीखी तकरार देखने को मिलेगी। हालांकि यह भी सच्चाई है कि वक्फ संशोधन बिल को संसद में पास होने से विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार को नहीं रोक पाएंगी। इसके पीछे का कारण है संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में एनडीएम के पक्ष में नंबर गेम। दोनों सदवों में एनडीए गठबंधन को पूर्ण बहुमत है। लिहाजा मोदी सरकार को रोकना इंडिया अलायंस के लिए असंभव है।
बीजेपी के लिए राहत वाली बात यह है कि सत्ता पर काबिज एनडीए गठबंधन के सबसे बड़े घटकों- तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी), जनता दल-यूनाइटेड (जेडीयू), शिवसेना और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने बिल के पक्ष में समर्थन देने का ऐलान किया है। नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू, जीतनराम मांझी, चिराग पासवान ने बिल के समर्थन में वोट करने का ऐलान किया है।
लोकसभा में एनडीए के पास पर्याप्त संख्याबल
लोकसभा में एनडीए के पास विधेयक को पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्याबल है। टीडीपी, जेडीयू, HAM और एलजेपी (R) समेत सभी एनडीए सहयोगियों ने अपने सांसदों को संसद में उपस्थित रहने और विधेयक का समर्थन करने के लिए व्हिप जारी किया है। लोकसभा में 542 सदस्य हैं। 542 सांसदों में से 240 बीजेपी के हैं, 12 जेडी(यू) के हैं, 16 टीडीपी के हैं, पांच एलजेपी (आरवी) के हैं, 2 राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के हैं और 7 शिवसेना के हैं। अगर एनडीए की सभी पार्टियां बीजेपी का साथ देती हैं तो बिल आसानी से पास हो जाएगा।
वहीं इंडिया गठबंधन के पास 235 सांसद हैं। अन्य को भी जोड़ दें तो ये संख्या 249 तक ही जाती है। जबकि बहुमत का नंबर 272 है। विपक्ष को लग रहा कि अगर 16 सांसद वाली टीडीपी और 12 सांसद वाली जेडीयू वक्फ बिल का विरोध कर दें तो गेम पलट सकता है, क्योंकि तब NDA का नंबर घटकर 265 हो जाएगा और बिल के विरोध में नंबर 277 पहुंच जाएगा।
राज्यसभा में एनडीए का संख्याबल ज्यादा
दूसरी ओर राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं। एनडीए के पास 125 सांसद हैं। इसमें से बीजेपी के 98, जेडी(यू) के चार, टीडीपी के दो, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तीन, शिवसेना का एक और आरएलडी का एक सांसद है। 245 सदस्यों वाले सदन में इस विधेयक को पारित कराने के लिए 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। एनडीए को भरोसा है कि उसे असम गण परिषद और तमिल मनिला कांग्रेस जैसी पार्टियों के साथ-साथ छह मनोनीत सदस्यों का समर्थन भी मिल जाएगा। ऐसे में यानी एनडीए के पास राज्यसभा में संख्याबल ज्यादा है।
बिल के विरोध में कौन-कौन?
संसद में बिल का विरोध करने के लिए भी विपक्षी गठबंधन ने कमर कस ली है। मंगलवार को विपक्षी दलों ने संसद भवन में बैठक की और अपनी रणनीति तैयार की। बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव, एनसीपी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले, तृणमूल कांग्रेस पार्टी के कल्याण बनर्जी और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह शामिल हुए। वहीं, डीएमके के टीआर बालू, तिरुचि शिवा और कनिमोझी, आरजेडी के मनोज कुमार झा, सीपीआई-एम के जॉन ब्रिटास, सीपीआई के संतोष कुमार पी, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन और वाइको भी मौजूद थे। .
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