हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम बजट सत्र में आज बड़ा हंगामा मचा। नगर निगम अनुसूचित जाति कामगार संघ ने महापौर को ज्ञापन सौंपकर कई अहम मांगें रखीं। संघ का कहना है कि निगम 1000 करोड़ रुपये का कर्ज लेने की बजाय कर्मचारियों के हित में ठोस फैसले ले।
क्या है कर्मचारियों की मांग ?
- ठेकेदारी प्रथा यानी आउटसोर्सिंग को खत्म किया जाए।
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वारिसों को निगम में नौकरी दी जाए।
- शहर की हर कॉलोनी में हर मकान में 5 छायादार पेड़ लगाना अनिवार्य हो।
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग को सख्ती से लागू किया जाए।
- शिक्षित कर्मचारियों को पदोन्नति दी जाए।
- 20 साल से स्थायीकरण का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
- नगर निगम सीमा में आने वाले गांवों में कर्मचारियों को आवासीय प्लॉट दिए जाएं।
अब नगर निगम को कर्मचारियों के हित में फैसला लेना चाहिए, न कि 1000 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर शहर पर बोझ बढ़ाना चाहिए। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन इस ज्ञापन पर क्या कदम उठाता है। क्या कर्मचारियों की मांगों पर कोई बड़ा फैसला होगा या फिर ये मुद्दे सिर्फ ज्ञापन तक सीमित रह जाएंगे?
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