Sawan Special: वाराणसी का ऐसा शिव मंदिर जहां पराजित हुए थे यमराज
साल भर इस मंदिर में ‘हर हर महादेव’ और ‘ओम नमः शिवाय’ की गूंज सुनाई देती है
गंगा-गोमती के पवित्र संगम तट पर बसा मार्कण्डेय महादेव का मंदिर, जहां सावन माह में तो तिल तक रखने की जगह नहीं होती है.
इस मंदिर की सबसे खास बात है कि यहां काल या यम के देवता यमराज भी पराजित हो गए थे
कथा के अनुसार, ऋषि मृकण्ड के पुत्र मार्कण्डेय को जन्म दोष था, जिसके अनुसार पृथ्वी पर उनकी आयु मात्र 14 वर्ष थी
उनके माता-पिता ने गंगा-गोमती तट पर बालू से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की कठोर तपस्या की.
जब मार्कण्डेय 14 वर्ष के हुए और यमराज उनके प्राण लेने आए, तब भोलेनाथ स्वयं प्रकट हुए
शिव ने यमराज को लौटने का आदेश दिया और कहा, “मेरा भक्त सदा अमर रहेगा और उसकी पूजा मुझसे पहले होगी.
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