वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। हाईकोर्ट ने जिला अस्पताल में नर्स की जगह गार्ड द्वारा मरीज को इंजेक्शन लगाने के मामले को गंभीरता से लिया है। सीएमएचओ व सिविल सर्जन को शासन के नोटिस के बाद इस संदर्भ में आगे क्या कार्रवाई की जा रही है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने कलेक्टर गरियाबंद को कलेक्टर से इस मामले में शपथपत्र में जानकारी मांगी थी।


मामले की सुनवाई के दौरान कलेक्टर की ओर से शपथ पत्र पेश किया गया, जिसमें बताया गया कि गार्ड को इंजेक्शन लगाने के लिए किसी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी या कर्मचारी द्वारा नहीं कहा गया था। गार्ड ने स्वयं ही इंजेक्शन लगा दिया है। लापरवाही के कारण गार्ड और सुरक्षा एजेंसी दोनों को हटा दिया गया है। हालांकि हाईकोर्ट इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुआ और सवाल किया कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है। कोई बाहरी व्यक्ति इलाज कर रहा।
कोर्ट ने जिला अस्पताल में ऐसी चूकों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए किए गए उपायों की भी जानकारी मांगी थी। शासन की ओर से कहा गया कि सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने के साथ ही सभी बातों पर ध्यान दिया जा रहा है।
बता दें कि गरियाबंद जिला अस्पताल में मरीज को नर्स की जगह गार्ड ने इंजेक्शन लगा दिया था। मीडिया में खबर आने पर हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया है। मामला तब प्रकाश में आया जब अपने भतीजे का इलाज कराने गए पूर्व पार्षद ने इस कृत्य को कैमरे में कैद कर लिया और तस्वीर वायरल कर दी।
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