लखनऊ. आरएसएस (संघ) के 100 साल पूरे होने के अवसर पर दिल्ली में तीन दिनों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यक्रम चला. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने घोषणा की कि राम मंदिर एकमात्र ऐसा आंदोलन था, जिसका संघ ने समर्थन किया था और वह काशी और मथुरा सहित ऐसे किसी अन्य अभियान का समर्थन नहीं करेगा. भागवत ने स्पष्ट किया कि आरएसएस के स्वयंसेवक ऐसे आंदोलनों में शामिल होने के लिए स्वतंत्र हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ एकमात्र राम मंदिर आंदोलन में सीधे तौर पर जुड़ा था. अब संघ किसी भी आंदोलन में शामिल नहीं होगा. अब मोहन भागवत के बयान को लेकर यूपी शिया वक़्फ बोर्ड चेयरमैन अली जैदी का बड़ा बयान सामने आया है.

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यूपी शिया वक़्फ बोर्ड चेयरमैन अली जैदी ने कहा, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि इस्लाम जब पहले दिन भारत में आया, तभी से यह यहां है और आगे भी रहेगा. मैंने यह बात पिछली बार भी कही थी. इस्लाम नहीं रहेगा, ये सोचने वाला हिंदू सोच का नहीं है, हिंदू सोच ऐसी नहीं होती. दोनों ओर यह विश्वास बनेगा तभी संघर्ष खत्म होगा. पहले ये मानना होगा कि हम सब एक हैं.

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आगे अली जैदी ने कहा, हम उनके इस बयान का स्वागत करते है और उन्हें यह यकीन दिलाते है की देश का मुसलमान देश पर मर मिटने को तैयार है जब पाकिस्तान जाने के रास्ते खुले थे तब जो यहां से नहीं गया वह सच्चा हिंदुस्तानी है, देश प्रेमी है. मुल्क की तारीख मुसलमानों के बलिदान की गवाही देती है वह चाहे जंगी मैदान हो या साइंस और एजुकेशन की फील्ड. हां हम यह मानते हैं कि हर मुल्क में ईमान फरोश होते हैं, जो मुल्क से सिर्फ लेना जानते हैं कुछ देना नहीं जानते और वह कहीं भी रहें कभी खुश नहीं होते. उनसे हर मजहब के आदमी को किनारा करना चाहिए और होशियार रहना चाहिए.

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क्या कहा था मोहन भागवत ने?

धर्म, संस्कृति और पूजा पद्धति को लेकर पूछे गए सवाल पर सरसंघचालक ने कहा कि हिंदू कहो या हिंदवी एक ही बात है. हिंदू मुस्लिम सब एक ही है. क्या बदली सिर्फ पूजा बदली है और कुछ नहीं. हमारा आइडेंटिटी एक ही है. हमारी संस्कृति, पूर्वज एक ही हैं. सिर्फ अविश्वास के चलते मन में शंका होता है दोनों तरफ. इस्लाम यहां है और यहां रहेगा ये हिंदू सोच है. दोनों धर्मों में ये कॉन्फिडेंस जगाना होगा. पहले भी कहा गया है कि रिलीजन बदलने से कौम नहीं बदलती. शहरों और रास्तों का नाम आक्रांताओं के नाम नहीं होने चाहिए. आप ये मत समझें कि हमने मुसलमानों के लिए बोला है. जो देशभक्त मुस्लिम हैं, उसके नाम पर रखना चाहिए. मुस्लमान को भी समझना होगा हम पूजा पद्धति से अलग हैं. जब ये भावना मुस्लिम समाज में पैदा हो जाएगा तो हिन्दू समाज तो भाईचारे के लिए सदा से राह देख रहा है.