सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)ने शुक्रवार को राज्यसभा के पूर्व सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी(Subramanian Swamy) की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा। याचिका में स्वामी ने सरकार से अनुरोध किया था कि वह ‘रामसेतु’ को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने के उनके अभ्यावेदन पर शीघ्रता से निर्णय ले। ‘रामसेतु’ तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी अपतटीय क्षेत्र स्थित पम्बन द्वीप और श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र स्थित मन्नार द्वीप के बीच स्थित चूना पत्थर की लंबी श्रृंखला है। जस्टिस विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की और केंद्र को नोटिस जारी किया। इस याचिका पर सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
स्वामी ने कहा है कि उन्होंने 2023 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर केंद्र सरकार से रामसेतु को अतिशीघ्र राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने याचिका में कहा कि रामसेतु ऐतिहासिक, पुरातात्विक और कलात्मक रूप से सभी मानकों पर खरा उतरता है और इसे जल्द से जल्द राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाना चाहिए।
बता दें कि रामसेतु को एडम ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है। यह रामेश्वरम द्वीप से श्रीलंका के मन्नार द्वीप तक फैली चूना पत्थर की श्रृंखला है। यूपीए सरकार ने इसी रास्ते से विवादित सेतु समुद्रम शिप कैनाल प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा और 2007 में प्रोजेक्ट पर रोक लग गई। कोर्ट ने कहा कि सरकार को रामसेतु को नुकसान पहुंचाए बिना कोई वैकल्पिक व्यापारिक मार्ग तलाशना होगा।
मान्यता है कि यह वही पुल है जिसे श्रीराम की वानर सेना ने लंका पर चढ़ाई करने के लिए बनाया था, जिससे हिंदू धर्म के दृष्टिकोण से रामसेतु की अहमियत और बढ़ जाती है। प्रमाणों के अनुसार यह बलुई रेखा लगभग 7 हजार साल पुरानी है। एक अध्ययन में यह भी दावा किया गया है कि यह प्राकृतिक नहीं बल्कि मानव निर्मित ढांचा है।
जानिए क्या है रामसेतु
भारत के रामेश्वरम और श्रीलंका के मन्नार द्वीप के बीच स्थित यह चूने की उथली चट्टानों की श्रृंखला भारत में रामसेतु और दुनियाभर में एडम्स ब्रिज (आदम का पुल) के नाम से जानी जाती है।
इस पुल की लंबाई लगभग 30 मील (48 किमी) है और यह मन्नार की खाड़ी और पाक जलडमरू को अलग करता है। इस इलाके में समुद्र बेहद उथला है, जिससे बड़ी नावों और जहाजों का संचालन कठिन होता है।
ऐसा कहा जाता है कि 15वीं शताब्दी तक इस ढांचे पर चलकर रामेश्वरम से मन्नार द्वीप तक जाया जा सकता था, लेकिन तूफानों के कारण समुद्र गहरा हो गया और यह पुल डूब गया।
1993 में नासा ने रामसेतु की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की थीं, जिसमें इसे मानव निर्मित पुल बताया गया था।
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