पटना। पटना पुलिस की विशेष टीम और स्थानीय पुलिस ने मोतिहारी के घोड़ासहन थाना क्षेत्र स्थित वीरता चौक पर एक साइबर कैफे में छापेमारी कर बड़े टेरर फंडिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में पुलिस को 98 आधार कार्ड, पासबुक, चेकबुक, 8 ड्राइविंग लाइसेंस, 16 वोटर आईडी, 9 डिजिटल स्कैनर, विदेशी करेंसी, 5 रोलेक्स घड़ियां और कई जाली दस्तावेज बरामद हुए।

दो लोग हुए गिरफ्तार

यह रेड 18 अगस्त को यूपी पुलिस की शिकायत के बाद हुई, जब साइबर ठगी के एक मामले की जांच करते हुए यूपी पुलिस घोड़ासहन पहुंची थी। वहां से भूषण चौधरी और उनके बेटे गोलू कुमार को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि दोनों बाप-बेटा पिछले दो सालों से साइबर कैफे की आड़ में हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेशी फंडिंग का नेटवर्क चला रहे थे।

विदेश भेज रहे थे काला धन

गोलू कुमार दो साल पहले कुछ लोगों के संपर्क में आया, जिन्होंने उसे बाइनेंस आईडी और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की जानकारी दी। इसके बाद उसने अपने पिता सहित अन्य लोगों की मदद से कई बाइनेंस अकाउंट बनवाए और काले धन को सफेद कर विदेश भेजना शुरू कर दिया।

इतनी बड़ी रकम भेजी विदेश

अब तक की जांच में सामने आया है कि उन्होंने पांच भारतीय और एक नेपाली बाइनेंस आईडी के जरिए लगभग 101 करोड़ 34 लाख रुपए विदेश भेजे। इनमें सबसे अधिक राशि गोलू की आईडी से ट्रांसफर हुई, जबकि दूसरे नंबर पर उसके पिता की आईडी से लेन-देन हुआ।

नेटवर्क का हुआ खुलासा

इस नेटवर्क का खुलासा तब हुआ जब यूपी निवासी विकास कुमार ने साइबर ठगी की शिकायत की। इसके बाद नवादा जिले के पथरा इंग्लिश गांव से पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई, जिनकी निशानदेही पर गोलू और उसके पिता की गिरफ्तारी हुई। वर्तमान में दोनों आरोपी जेल में हैं और अब उत्तर प्रदेश पुलिस उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। इस मामले में एक अन्य फरार अभियुक्त आलोक कुमार की तलाश जारी है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस रैकेट से जुड़े सभी दस्तावेजों और लेन-देन की गहराई से जांच कर रही हैं। साथ ही नेपाल से जुड़ी बाइनेंस आईडी की जानकारी के लिए संबंधित कंपनी से भी डेटा मांगा गया है।