लखनऊ. आरएसएस (संघ) के 100 साल पूरे होने के अवसर पर दिल्ली में तीन दिनों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यक्रम चला. जिसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि इस्लाम नहीं रहेगा, ये सोचने वाला हिंदू सोच का नहीं है, हिंदू सोच ऐसी नहीं होती. दोनों ओर यह विश्वास बनेगा तभी संघर्ष खत्म होगा. इस बयान को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य और ईदगाह इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली की प्रतिक्रिया सामने आई है.

मौलाना ने कहा कि ये देश कानून और संविधान से चलता है और सभी समुदायों को इसे मानना चाहिए. ‘जब संसद ने स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक स्थलों की स्थिति 1947 के अनुरूप ही बनी रहेगी और सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसकी पुष्टि कर दी है, तो फिर इस मुद्दे पर नए-नए विवाद पैदा करना सही नहीं है.’ उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह संघ प्रमुख मोहन भागवत ने धार्मिक स्थलों पर आगे कोई विवाद न बढ़ाने की बात कही है, वह स्वागत योग्य कदम है. उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान समाज में भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करेंगे.

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क्या कहा था मोहन भागवत ने?

धर्म, संस्कृति और पूजा पद्धति को लेकर पूछे गए सवाल पर सरसंघचालक ने कहा कि हिंदू कहो या हिंदवी एक ही बात है. हिंदू मुस्लिम सब एक ही है. क्या बदली सिर्फ पूजा बदली है और कुछ नहीं. हमारा आइडेंटिटी एक ही है. हमारी संस्कृति, पूर्वज एक ही हैं. सिर्फ अविश्वास के चलते मन में शंका होता है दोनों तरफ. इस्लाम यहां है और यहां रहेगा ये हिंदू सोच है. दोनों धर्मों में ये कॉन्फिडेंस जगाना होगा. पहले भी कहा गया है कि रिलीजन बदलने से कौम नहीं बदलती. शहरों और रास्तों का नाम आक्रांताओं के नाम नहीं होने चाहिए. आप ये मत समझें कि हमने मुसलमानों के लिए बोला है. जो देशभक्त मुस्लिम हैं, उसके नाम पर रखना चाहिए. मुस्लमान को भी समझना होगा हम पूजा पद्धति से अलग हैं. जब ये भावना मुस्लिम समाज में पैदा हो जाएगा तो हिन्दू समाज तो भाईचारे के लिए सदा से राह देख रहा है.