Dharm Desk – सनातन परंपरा में पितृपक्ष के दौरान पड़ने वाले प्रदोष व्रत का पूजा-पाठ में विशेष महत्व होता है। आज 8 अक्टूबर प्रदोष व्रत है। इसकी पूजा के लिए सबसे अच्छा समय मतलब प्रदोष काल शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक रहेगा। सूर्यास्त के ठीक बाद का यह समय भगवान शंकर और पितरों की आराधना के लिए विशेष प्रभावशाली माना जाता है। इस दौरान किया गया दीपदान, शिव पूजन और पितरों का स्मरण धार्मिक दृष्टि से मंगलकारी माना जाता है।

खासकर चार बत्तियों वाला दीपक जलाने की परंपरा को चारों दिशाओं में प्रकाश फैलाने और जीवन में सकारात्मकता का प्रतीक मानते है। कहते है कि इस समय श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से मन को शांति मिलती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है। इस मुहूर्त में शिवलिंग की पूजा करने और दीपदान करने से भवान शंकर के साथ-साथ पितरों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। यदि इस विशेष शाम के समय नियमपूर्वक चार बत्तियों का दीपक जलाकर चार प्रमुख पितरों का ध्यान किया जाए तो जीवन से दरिद्रता, कष्ट और हर प्रकार की बाधाएं हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं।

4 बत्ती वाले दीपक की पूजा विधि

पितृपक्ष के प्रदोष व्रत के दिन संध्या काल के समय एक चौमुखी दीपक लें और उसमें शुद्ध गाय का घी डालकर चार बत्तियां लगाएं जिससे चारों दिशाओं में लौ प्रज्वलित हो सके। दीपक प्रज्वलित करते समय चार प्रमुख पितरों
.अग्निश्वत्ता पितर
.बर्हिषद पितर
.आज्यप पितर
.सोमपा पितर

इनका श्रद्धा पूर्वक स्मरण करें और दीपक जला कर चारों पितरों को हाथ जोड़कर नमन करें अपनी सभी समस्याओं को दूर करने की प्रार्थना करें। इस प्रज्वलित दीपक को या तो पीपल के पेड़ के नीचे रखें या पास के किसी शिवालय में अर्पित कर दें। प्रदोष काल में यह उपाय करने से भगवान शंकर और पितरों का विशेष आर्शीवाद प्राप्त होता है।