Washington: भारत में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी बहस के बीच अब अमेरिका में भी बड़े पैमाने पर मतदाता सूची की जांच शुरू होने की खबर है। डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने देशभर के वोटर रिकॉर्ड की समीक्षा और एक राष्ट्रीय मतदाता डेटाबेस तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान के दायरे में करीब 26 लाख भारतवंशी अमेरिकी वोटर भी आ सकते हैं, जिनमें से लगभग 10 लाख के नाम जांच के बाद प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

ICE को मिली वोटर डेटाबेस की जिम्मेदारी

ट्रम्प प्रशासन ने इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) को इस प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी दी है। सभी 50 राज्यों में मतदाता सूची को विभिन्न सरकारी रिकॉर्ड और इमिग्रेशन डेटाबेस से मिलाने की तैयारी है। इसके लिए करीब 125 करोड़ रुपये के फंड की बात सामने आई है।

घर-घर सर्वे नहीं, डिजिटल रिकॉर्ड का होगा मिलान

भारत के SIR से अलग अमेरिका में घर-घर जाकर सत्यापन नहीं होगा। कंप्यूटर आधारित प्रक्रिया में वोटर रजिस्ट्रेशन की जानकारी को इमिग्रेशन और अन्य सरकारी रिकॉर्ड से क्रॉस-चेक किया जाएगा। रिकॉर्ड में विसंगति मिलने पर संबंधित मतदाता की जानकारी की दोबारा जांच हो सकती है।

भारतवंशी वोटरों पर क्यों पड़ेगा असर?

न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे राज्यों में भारतीय मूल के मतदाता राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माने जाते हैं। ऐसे में वोटर रिकॉर्ड की व्यापक जांच का असर इस समुदाय पर भी पड़ सकता है। हालांकि, वास्तव में कितने नाम हटेंगे, यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

‘SAVE America Act’ और वोटर ID पर ट्रम्प का जोर

ट्रम्प लंबे समय से वोटर ID और नागरिकता के सख्त प्रमाण के समर्थक रहे हैं। प्रस्तावित SAVE America Act में वोटर रजिस्ट्रेशन के दौरान नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण और मतदान के समय फोटो ID अनिवार्य करने का प्रावधान है। विधेयक प्रतिनिधि सभा से पारित हो चुका है, लेकिन सीनेट की मंजूरी अभी बाकी है।

राज्यों के अलग-अलग नियम बड़ी चुनौती

अमेरिका में भारत की तरह कोई एक केंद्रीय चुनाव आयोग पूरे देश के चुनाव संचालित नहीं करता। चुनाव व्यवस्था मुख्य रूप से राज्यों और स्थानीय प्रशासन के अधीन है। इसलिए वोटर रजिस्ट्रेशन और पहचान संबंधी नियम भी राज्य-दर-राज्य अलग हैं। इसी वजह से राष्ट्रीय स्तर पर वोटर डेटाबेस बनाने की कवायद कानूनी और राजनीतिक विवाद को जन्म दे सकती है।

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