Rajasthan News: राजस्थान की राजधानी जयपुर में आज से शहरी प्रशासन का नया ढांचा लागू हो गया है। अब तक अलग-अलग काम कर रहे जयपुर हेरिटेज नगर निगम और जयपुर ग्रेटर नगर निगम को समाप्त कर दिया गया है। दोनों संस्थाओं के विलय के बाद आज (10 नवंबर) से पूरी राजधानी में एकीकृत ‘जयपुर नगर निगम’ व्यवस्था लागू हो गई है।

क्या बदला है
- अब जयपुर में केवल एक ही नगर निगम होगा।
- निगम भवन से ‘ग्रेटर’ शब्द हटा दिया गया है।
- सभी सरकारी दस्तावेज जैसे जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, विवाह प्रमाणपत्र, भवन निर्माण अनुमति, पट्टे और लाइसेंस अब जयपुर नगर निगम के नाम से जारी होंगे।
- नागरिकों को अब किसी भी क्षेत्र के लिए अलग-अलग कार्यालय नहीं जाने होंगे।
- प्रशासनिक कामकाज एकीकृत ढांचे से होगा, जिससे समन्वय और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगे।
वेबसाइट और डिजिटल रिकॉर्ड भी होंगे अपडेट
नगर निगम की वेबसाइट और सभी डिजिटल सिस्टम को नई संरचना के अनुरूप बदला जा रहा है। सारी नागरिक सेवाएं जैसे कर भुगतान, शिकायत पंजीकरण, या प्रमाणपत्र आवेदन एक ही पोर्टल पर उपलब्ध होंगी। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया सरल और नागरिकों के लिए अधिक पारदर्शी होने की उम्मीद है।
फिलहाल प्रशासक के अधीन रहेगी व्यवस्था
चूंकि वर्तमान बोर्डों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए अभी के लिए निगम की जिम्मेदारी संभागीय आयुक्त (डिविजनल कमिश्नर) के पास रहेगी। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक नई चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। चुनाव के बाद ही नया महापौर और पार्षद बोर्ड पदभार संभालेंगे।
जोधपुर में भी अपनाया गया यही मॉडल
राज्य सरकार ने इसी तरह का कदम जोधपुर में भी उठाया है। वहां पहले दो नगर निगम उत्तर और दक्षिण अलग-अलग काम कर रहे थे। अब उन्हें मिलाकर 100 वार्डों वाला एक ही नगर निगम बना दिया गया है। पहले उत्तर निगम में कांग्रेस का बोर्ड था, जबकि दक्षिण निगम में भाजपा का। दोनों बोर्डों का कार्यकाल खत्म होने के साथ अब वहां भी एकीकृत प्रणाली लागू हो चुकी है।
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