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बस 2 दिन में उड़ गए निवेशकों के करोड़ों रुपए, एक फैसले ने गिरा दिया कंपनी का किला, पढ़िए ‘ब्लैक मंडे’ और ‘ब्लैक ट्यूसडे’ की कहानी ?

Trisha Agrawal
11 Nov 2025, 01:01 PM November 11, 2025
कारोबार
बस 2 दिन में उड़ गए निवेशकों के करोड़ों रुपए, एक फैसले ने गिरा दिया कंपनी का किला, पढ़िए ‘ब्लैक मंडे’ और ‘ब्लैक ट्यूसडे’ की कहानी ?
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शेयर बाजार के इतिहास में ऐसे मौके कम ही आते हैं जब किसी कंपनी के शेयर लगातार दो दिनों में 28% तक टूट जाएं. ट्रांसफॉर्मर्स एंड रेक्टिफायर्स (इंडिया) लिमिटेड – यानी TRIL के निवेशकों के लिए यह हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. सोमवार और मंगलवार, दोनों ही दिन कंपनी के शेयरों में बंपर गिरावट दर्ज हुई. 11 नवंबर की सुबह जैसे ही बाजार खुला, TRIL का स्टॉक 10% के लोअर सर्किट में फंस गया. इससे पहले सोमवार को यह पहले ही 20% टूट चुका था. दो दिन में निवेशकों की करोड़ों की पूंजी डूब गई.

कमजोर तिमाही नतीजे बने पहला झटका

दरअसल, यह गिरावट अचानक नहीं आई थी. कंपनी के सितंबर तिमाही (Q2 FY26) के नतीजे ही इसके पहले संकेतक थे. कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर सिर्फ 0.2% घटकर ₹460 करोड़ रह गया, लेकिन सबसे बड़ा झटका मुनाफे पर पड़ा. कंपनी का नेट प्रॉफिट और ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) दोनों ही 25% तक गिर गए.

कभी शानदार प्रदर्शन करने वाली इस कंपनी का EBITDA मार्जिन अब सिर्फ 11.2% रह गया है, जबकि पिछले साल यही आंकड़ा 14.9% था. यानी कंपनी ने हर ₹100 की कमाई पर अब ₹11 ही बचाए, जबकि पहले ₹15 तक बचाती थी. मैनेजमेंट ने इसे कर्मचारियों के बढ़े वेतन और ऑपरेटिंग खर्च में तेजी का नतीजा बताया, लेकिन निवेशकों ने इसे कमजोरी का संकेत मान लिया.

दूसरा और बड़ा झटका – वर्ल्ड बैंक की कार्रवाई

कमजोर नतीजों के बीच, मंगलवार को एक और धमाकेदार खबर आई – जिसने TRIL के शेयरों को ताश के पत्तों की तरह बिखेर दिया. वर्ल्ड बैंक ने कंपनी को अपने फंडिंग वाले प्रोजेक्ट्स से डीबार (प्रतिबंधित) कर दिया. यह फैसला नाइजीरिया की इलेक्ट्रिक ग्रिड अपग्रेड परियोजना (₹48.6 करोड़ डॉलर) में कथित भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोपों के बाद लिया गया. यानी TRIL अब वर्ल्ड बैंक से जुड़ी किसी भी परियोजना में भाग नहीं ले सकेगी.

कंपनी ने सफाई में कहा कि यह प्रतिबंध “प्रोजेक्ट स्पेसिफिक” है और घरेलू कारोबार या अन्य विदेशी बाजारों में इसका कोई प्रत्यक्ष असर नहीं पड़ेगा. लेकिन निवेशकों के लिए भरोसा एक बार टूट गया – और बाजार ने उसे बख्शा नहीं.

मार्केट में मायूसी, लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स अब भी पॉजिटिव

बाजार विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम को “शॉर्ट-टर्म पैनिक” मान रहे हैं. एक मार्केट एक्सपर्ट ने CNBC-TV18 से कहा – “वर्ल्ड बैंक का प्रतिबंध जरूर गंभीर दिखता है, लेकिन TRIL का ज्यादातर कारोबार घरेलू सेक्टर में है. कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत है, इसलिए लंबी अवधि में यह गिरावट खरीदारी का मौका भी बन सकती है.” हालांकि, रिटेल निवेशक फिलहाल इससे सहमत नहीं दिख रहे. दो दिन में स्टॉक ₹392 से गिरकर ₹282.55 पर आ चुका है – यानी 28% की साफ गिरावट.

पिछले एक साल का ग्राफ: उतार के बाद फिर उतार

2024 में TRIL के शेयर ने शानदार रिटर्न दिया था – एक साल में 120% से अधिक उछलकर. लेकिन 2025 में कंपनी लगातार दबाव में है. पिछले छह महीनों में यह स्टॉक लगभग 40% टूट चुका है. कभी पावर सेक्टर के ‘राइजिंग स्टार’ माने जाने वाली TRIL अब निवेशकों के लिए एक जोखिम भरा दांव बन चुकी है.

निवेशकों के लिए संकेत: सावधानी जरूरी

विश्लेषक मानते हैं कि अभी कंपनी के फंडामेंटल और प्रोजेक्ट स्ट्रक्चर में स्पष्टता आने तक इसमें नए निवेश से बचना ही बेहतर होगा. जो निवेशक पहले से इसमें हैं, उनके लिए यह लॉन्ग टर्म होल्ड का मामला बन सकता है – बशर्ते कंपनी अगले दो क्वार्टर्स में अपनी आय और मुनाफे की रिकवरी दिखा सके.

TRIL के शेयरों की यह गिरावट सिर्फ कमजोर नतीजों की वजह से नहीं, बल्कि भरोसे पर पड़े धब्बे की कहानी है. दो दिनों में 28% की गिरावट ने यह साबित कर दिया कि बाजार सिर्फ आंकड़ों पर नहीं, भरोसे पर चलता है – और एक बार वो टूटे तो रिकवरी आसान नहीं.

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