चंडीगढ़। पंजाब की भगवंत मान सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है, जो सीधे तौर पर हर परिवार के भविष्य से जुड़ी हुई है। 18 नवंबर से शुरू हुआ यह घर-घर सर्वेक्षण कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रदेश के हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने की एक कवायद है। सरकार का लक्ष्य यह गारंटी देना है कि राज्य का कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रह जाएं।
इस अभियान के तहत, शिक्षा विभाग की टीमें सीधे लोगों के दरवाजे पर पहुंच रही हैं। यह पहली बार हैं जब सर्वेक्षण का दायरा स्कूलों और दफ्तरों से निकलकर आम लोगों के घर तक पहुंचा है। चाहे वह प्रवासी मजदूर का परिवार हो, दिहाड़ी मजदूर हो या झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग हों, अब उनके बच्चे ‘अदृश्य’ नहीं रहेंगे। इस कदम से स्पष्ट है कि मान सरकार की प्राथमिकता में गरीब और वंचित तबके को ऊपर रखा गया है। यह नीति ‘वीआईपी संस्कृति’ को खत्म करते हुए हर नागरिक के बच्चे को गरिमामय शिक्षा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

इस सर्वेक्षण में विशेष रूप से कमजोर समूहों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। चाहे बच्चा सड़क किनारे काम करने वाले परिवार से हो, ढाबे के मजदूर का बच्चा हो या फिर कूड़ा बीनने वालों का, अब सभी को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जाएगा।
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