सरकार ने 25 नवंबर से धान खरीद शुरू होने का दावा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर एक भी बोरा धान नहीं उठाया गया. मिलरों को मार्केट यार्ड से कोई अलर्ट नहीं मिला है, भंडारण की व्यवस्था नहीं है और किसान पंजीकरण भी नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने मांग की कि आपूर्ति मंत्री और सहकारिता मंत्री तुरंत स्थिति का जायजा लें और आवश्यक कदम उठाएँ.

Odisha News:  भुवनेश्वर. किसानों से धान खरीद प्रक्रिया शुरू न होने को लेकर ओडिशा विधानसभा में विपक्ष ने गंभीर चिंता जताई. विपक्ष के उपनेता प्रसन्न आचार्य ने कहा कि 28 नवंबर बीत जाने के बाद भी सरकार ने अब तक धान खरीद शुरू नहीं की है, जिससे किसानों की आजीविका और भविष्य पर संकट गहराया है. शून्य काल में इस मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 25 नवंबर से धान खरीद शुरू होने का दावा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर एक भी बोरा धान नहीं उठाया गया. मिलरों को मार्केट यार्ड से कोई अलर्ट नहीं मिला है, भंडारण की व्यवस्था नहीं है और किसान पंजीकरण भी नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने मांग की कि आपूर्ति मंत्री और सहकारिता मंत्री तुरंत स्थिति का जायजा लें और आवश्यक कदम उठाएँ. उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके आरोपों में एक भी तथ्य गलत साबित होता है, तो वे किसी भी प्रकार की सजा के लिए तैयार हैं. आचार्य ने कहा कि यह मुद्दा राजनीति से ऊपर है, क्योंकि यह किसानों की जीविका और राज्य की अर्थव्यवस्था से सीधा जुड़ा है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि धान खरीद में बाधा से राज्य भर में आक्रोश फैल सकता है. किसान राज्य की मेरुदंड हैं. यदि किसानों के साथ खिलवाड़ होगा, तो सरकार भी नहीं टिक पाएगी.

बंगाली संवादों पर हंगामा

ओडिशा विधानसभा के प्रश्नोत्तर काल में शुक्रवार को उस समय अप्रत्याशित हंगामा हो गया, जब स्कूल ड्रॉपआउट दर पर चर्चा के दौरान अचानक बंगाली वाक्यों का आदान-प्रदान शुरू हो गया. स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग से जुड़े सवालों पर बहस कर रहे विधायकों के बीच तीखी टिप्पणियों ने सदन का माहौल तनावपूर्ण बना दिया. बहस की शुरुआत तब हुई जब बीजद विधायक रणेंद्र प्रताप स्वाईं ने ड्रॉपआउट आंकड़ों पर सवाल खड़े करते हुए बंगाली मे कहा हिसाब-किताब तो सही है, फिर बच्चे कम क्यों हो रहे हैं? उनकी इस बंगाली टिप्पणी ने सदन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. इसके बाद भाजपा विधायक सिद्धांत महापात्र ने एक सवाल पूछते-पूछते अपना रुख स्वाईं की ओर मोड़ लिया और बंगाली अंदाज में तंज कसते हुए कहा- तुम्हारे पास सिर्फ लड़के थे, मेरे पास लड़के और लड़कियाँ दोनों हैं. इस टिप्पणी ने सदन में हलचल पैदा कर दी और दोनों पक्षों के सदस्य अपनी-अपनी ओर से टोकाटाकी करने लगे. कई मिनट तक माहौल शोरगुल से भरा रहा. इसके बाद बीजद विधायक स्वाईं ने शिक्षा विभाग से तीखे सवाल पूछते हुए कहा- आपने जो आंकड़े दिए, क्या आप पूरे राज्य का डेटा देंगे? यूडीआईएसई प्लस रिपोर्ट के मुताबिक हर साल दाखिले क्यों घट रहे हैं? कार्यक्रमों का वास्तविक असर क्या है? शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए? जवाब में भाजपा विधायक महापात्र ने कहा, अआठगढ़ विधायक ने जो सवाल उठाया है, उसके अनुसार यदि बीआरसी, सीआरसीसी और बीईओ जैसे फील्ड-लेवल अधिकारियों को बेहतर काम के लिए प्रोत्साहन दिया जाए, तो इसका सकारात्मक असर दिख सकता है. इस दौरान दोनों दलों के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक बढ़ गई, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा और व्यवस्था बहाल करानी पड़ी. इस घटना ने एक बार फिर इस बात पर बहस छेड़ दी है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर विधायकों की भाषा, व्यवहार और गरिमा किस स्तर पर रहनी चाहिए. राजनीतिक टिप्पणियों के बीच शिक्षा की मूल समस्या ड्रॉपआउट दर में लगातार गिरावट-एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गई है.