पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी किरण बेदी(Kiran Bedi) ने दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु प्रदूषण की स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(PM Narendra Modi) से हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने पीएम से अनुरोध किया कि वे अपने ‘मन की बात’ संबोधन में इस गंभीर मुद्दे को उठाएं, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़े और प्रभावी कदमों की दिशा तय हो सके। किरण बेदी ने इस संबंध में प्रधानमंत्री से माफी भी मांगी, यह कहते हुए कि वह सीधे उनसे अपील करने को मजबूर हैं क्योंकि हालात लगातार चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। उनका यह संदेश उस दिन सामने आया जब राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) 369 दर्ज किया गया जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है।
किरण बेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया कि वे अपने आगामी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में दिल्ली के वायु प्रदूषण के मुद्दे को विशेष रूप से संबोधित करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता और नेतृत्व का संदेश राजधानी सहित पूरे उत्तर भारत में वायु गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों को तेज कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने पुडुचेरी के उपराज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल का अनुभव भी साझा किया। बेदी ने याद दिलाया कि उस दौरान अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ज़ूम पर लिया गया सेशन बेहद प्रभावी साबित हुआ था और उसने प्रशासनिक कामकाज में सकारात्मक बदलाव लाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
किरण बेदी ने अपने संदेश में PM नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए लिखा “सर, कृपया मुझे दोबारा विनती करने के लिए माफ करें। लेकिन मैंने पुडुचेरी में अपने कार्यकाल के दौरान आपके बेहद प्रभावी ज़ूम सेशन देखे हैं। आपने कैसे सभी को कई राष्ट्रीय चुनौतियों में समयबद्ध तरीके से काम करने के लिए प्रेरित किया। कैसे सभी को समय सीमा और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया।”
उन्होंने कहा कि इसी तरह का नेतृत्व और मार्गदर्शन दिल्ली में लगातार बिगड़ रही वायु गुणवत्ता की समस्या से निपटने के लिए भी बेहद जरूरी है। बेदी का मानना है कि प्रधानमंत्री द्वारा इस विषय को ‘मन की बात’ में उठाने से केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय बनेगा और जनता में भी जागरूकता बढ़ेगी।
किरण बेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह भी आग्रह किया कि वे दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों के साथ हर महीने एक वर्चुअल मीटिंग करें। उनका कहना है कि इससे प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कदमों की प्रगति की नियमित समीक्षा हो सकेगी और सभी राज्यों पर जवाबदेही भी तय होगी। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि ऐसी मीटिंग्स लोगों में भरोसा जगाएंगी, “क्योंकि उन्हें पता चलेगा कि सब कुछ आपकी निगरानी में है। तभी लोग राहत की सांस ले सकेंगे।”
किरण बेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वे अपने ‘मन की बात’ संबोधन में दिल्ली के वायु प्रदूषण के मुद्दे को जरूर उठाएं, ताकि सभी आयु वर्ग के लोग इस समस्या की गंभीरता को समझ सकें। उनका कहना है कि यदि प्रधानमंत्री इस विषय पर सीधे लोगों से बात करेंगे, तो उन्हें यह भी समझाया जा सकेगा कि वे व्यक्तिगत स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण में कैसे योगदान दे सकते हैं जैसे वाहनों का कम उपयोग, कचरा न जलाना, ऊर्जा बचत और पर्यावरण–अनुकूल आदतें अपनाना। बेदी ने अंत में कहा कि दिल्ली इस मामले में भी ‘डबल इंजन’ की प्रतीक्षा करती रही अर्थात केंद्र और राज्य दोनों के सक्रिय और समन्वित प्रयास ताकि पिछले दस वर्षों में वायु गुणवत्ता को पहुंचा नुकसान किसी हद तक पूरा किया जा सके।
दिल्ली में प्रदूषण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच किरण बेदी लगातार अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट के माध्यम से वायु गुणवत्ता से जुड़े मुद्दों पर जोरदार तरीके से संदेश साझा कर रही हैं। उन्होंने लोगों, अधिकारियों और पड़ोसी राज्यों से सहयोगात्मक रवैया अपनाने की अपील की है। बेदी का कहना है कि प्रदूषण कोई अचानक उत्पन्न हुई समस्या नहीं है, बल्कि यह “शासन में सच्चे समन्वय और दीर्घकालिक योजना के अभाव की दशकों पुरानी देन” है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि जब तक सभी संबंधित एजेंसियां केंद्र, राज्य, स्थानीय प्रशासन और जनता एक साथ मिलकर काम नहीं करेंगी, तब तक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं होगा।
प्रदूषण रोकथाम के लिए कई उपाय लागू किए जाने के बावजूद दिल्ली में वायु गुणवत्ता पिछले दो हफ्तों से लगातार ‘बेहद खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी के बीच बनी हुई है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर।
वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली (Air Quality Early Warning System) के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले सप्ताह में भी हालात में विशेष सुधार की उम्मीद नहीं है। पूर्वानुमान बताता है कि हवा की गुणवत्ता आगे भी ‘बेहद खराब’ स्तर पर रह सकती है, क्योंकि मौसम की स्थिति और हवा की धीमी गति प्रदूषकों के फैलाव में बाधा बन रही है।
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