पटना। भोपाल में आयोजित जमीयत उलेमा-ए-हिंद की नेशनल गवर्निंग बॉडी मीटिंग शनिवार को संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने मुसलमानों के हालात और ‘जिहाद’ शब्द को लेकर हो रही राजनीति पर खुलकर अपनी बात रखी।
भोपाल में मौलाना मदनी ने कहा कि जिहाद जैसे पवित्र धार्मिक विचार को वर्षों से गलत अर्थों में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद जैसे शब्द मुस्लिम समाज की मान मर्यादा पर सीधा वार करते है और यह केवल चंद संगठनों तक सीमित नहीं बल्कि कई बार सत्ता और मीडिया के जिम्मेदार लोग भी इन्हें बढ़ावा देते हैं। जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा, उनका यह बयान अब राजनीतिक रूप ले लिया है । उन्होंने कहा कि देश के मौजूदा हालात में मुसलमान कानूनी, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ते जा रहे हैं। मॉब लिंचिंग, बुलडोजर कार्रवाई, वक्फ संपत्तियों पर कब्जे और मदरसों को निशाना बनाए जाने जैसी घटनाओं ने समुदाय में असुरक्षा बढ़ा दी है। उनकी बातों में एक गहरी चिंता झलक रही थी आज मुसलमान सड़क पर चलते हुए भी अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं करते।
मौलाना मदनी ने न्यायपालिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद और ट्रिपल तलाक के निर्णयों के बाद आम मुसलमान में यह धारणा बनी है कि न्यायालयों पर सरकारी दबाव है। दूसरी ओर भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने उनके बयान को धमकीपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसा केवल अपराधी मानसिकता वाला व्यक्ति ही कह सकता है। उन्होंने दावा किया कि दुनिया में सबसे सुरक्षित माहौल यदि कहीं मुस्लिम समाज को मिला है, तो वह भारत है।
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