राजकुमार पाण्डेय की कलम से
आनंद की बात फिर भी महोदया के तीखे तेवर
मंत्रालय में इस वक्त लगभग सब आनंदमय है. दरअसल, कुछ नया चल ही नहीं रहा है. बड़ी शांति सी है. बस इसी बात पर कोहराम मच गया. दरअसल, बीते दिनों एक मंत्री महोदया के मंत्रालय से संबंधित एक वीसी चल रही थी. विभाग के प्रमुख सचिव को छोड़ प्रदेश के लगभग सभी वरिष्ठ अधिकारी जुड़े हुए थे. महोदया अक्सर समय पर नहीं रहती. लेकिन, वाट्सएप ग्रुप में पीए ने अफसरों समय का ध्यान दिलाने वाले अनुरोध का एक संदेश भेजा ही दिया. मंत्री महोदया करीब आधे घंटे से ज्यादा समय तक नहीं जुड़ी. देर शाम अफसरों ने भी आनंद की आपसी बातचीत शुरू की. वरिष्ठ ने पूछा कैसा चल रहा है, कनिष्ठ ने कहा कि सब आनंद है. अफसर ने कह ही दिया हां अपने विभाग में आनंद ही आनंद है. यह बात मंत्री महोदया को पता चली तो भूचाल सा आ गया. अक्सर शांत रहने वाली भारतीय नारी की तरह लंबे समय से शासन-प्रशासन को देखने वाली मंत्री जी को आखिर क्या बुरा लगा, यह चर्चा का विषय है।
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कांग्रेस में जब मिला पलटकर जबाव
इसमें दोमत नहीं कि बीजेपी से कही ज्यादा अनुशासनहीनता कांग्रेस में दिखाई देती है. बीते दिनों कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठ हुई. एक बड़े कद के मालदार नेता जो प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी संभालते हैं, उनकी एक बार फिर एक प्रवक्ता महोदय ने लू उतार दी. दरअसल, महोदय अपने अधिनस्तों की टीवी चैनल पर अपने से कई सौ गुना ख्याति पाते देख बड़े कुंठित हो जाते हैं. लिहाजा अपने गुट के प्रवक्ताओं को छोड़ अन्य से शत्रुता का भाव सा रखते हैं. बैठक खत्म होते ही कमरे में एक पत्रकार ने एक प्रवक्ता के कान में कुछ कहा. आदरणीय ने कहा कि क्या बात है भाई खुलकर बता दो. बस फिर क्या था कक्ष में भरी सभा में नेताजी को अपने काम से काम रखने का पाठ पढ़ा दिया गया.
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संतोष के खिलाफ मंत्रालय में असंतोष
बीते दिनों सवर्णों पर विवादित बयान देने वाले आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ सड़कों से लेकर सोशल मीडिया समेत तमाम मंचों पर विरोध का दौर जारी है. अब मंत्रालय में भी वर्मा के खिलाफ दबी जंग शुरू हो गई है. न सिर्फ सवर्ण वर्ग बल्कि पिछड़े वर्ग के अधिकारियों ने भी संतोष के खिलाफ कन्नी काटना शुरू कर दिया है. कई अफसरों ने तो संतोष के अन्य मामलों की फाइल भी निकालना शुरू कर दी है. बयान के बाद एक दर्जन से ज्यादा आरटीआई लगाई गई है. वह भी खास-खास मामलों की जो कि अंदरूनी हैं. खैर…इसमें दोमत नहीं की संतोष का बयान बेहद आपत्तिजनक या घाटिया बयान था, रंजिश कभी अच्छी नहीं होती.
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