Gita Jayanti 2025: रायपुर. मागर्शीर्ष मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को Mokshada Ekadashi कहते हैं जो 1 दिसंबर सोमवार को रेवती नक्षत्र में मातंग योग में व्रत रखा जाएगा. इसी दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का संदेश दिया था जिसके कारण इस दिन गीता जयंती भी मनाया जाता है. यह एकादशी सभी पापों को दूर करती है, इसलिए इस दिन दान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

पौराणिक मान्यतानुसार एकादशी की महिमा ऐसी है कि युधिष्ठिर से भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि वैखानस नाम के राजा थे जो अपनी प्रजा का पालन कर रहे थे. एक रात उनको स्वप्न में उनके पितर नरक में दिखाई दिए तथा अपनी उद्धार के उपाय करने को कहने लगे, दूसरे दिन निद्रा से जागकर राजा प्रातः अपने राज्य के ब्राह्मणों को बुलवाकर उनसे इसका उपाय पूछा, तब ब्राह्मणों ने उन्हें पर्वत मुनि के पास ले गए और पर्वत मुनि ने ध्यान लगाकर देखा फिर राजा से कहा कि मागर्शीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखने से उसके पुण्य से आपके पितरों का उद्धार होगा. राजा मुनि से मिलकर वहां से वापस आकर उस एकादशी का व्रत किया जिसके प्रभाव से उनके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति हुई. यह एकादशी सभी पापों से मुक्त कर मोक्ष प्रदान करता है. (Mokshada Ekadashi 2025)
ये हैं पूजा विधि
इस एकादशी को व्रत का पालन करते हुए भगवान के कृष्ण स्वरूप की पूजा कर उस पर तुलसी अर्पण करना चाहिए और धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल आदि अर्पण कर भगवान की सच्चे मन से आराधना करनी चाहिए तथा विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करना चाहिए, इसके उपरांत गीता पाठ करें.
