वीरेंद्र कुमार, नालंदा। सोहसराय थाना क्षेत्र के श्रृंगारहाट मोहल्ला से लापता हुए टेंट संचालक कमलेश के मामले में पुलिस ने 72 घंटे बाद बड़ी सफलता हासिल की है। जिस कमलेश के अपहरण और अनहोनी की आशंका पत्नी ने जताई थी, वह सकुशल बख्तियारपुर से बरामद कर लिए गए। जांच में सामने आया कि वह किसी अपराधी गिरोह द्वारा उठाया नहीं गया था, बल्कि काम के भारी दबाव और बढ़ते कर्ज से घबरा कर घर छोड़कर भाग गया था।
पत्नी ने जताई थी किडनैपिंग की आशंका
कमलेश की अचानक गुमशुदगी के बाद उनकी पत्नी ने थाने में आवेदन दिया था। उन्होंने आशंका जताई थी कि पति पर लगातार बढ़ते कर्ज और काम का दबाव था, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान थे और शायद किसी अनहोनी के शिकार हो गए हों। घटना दर्ज होने के अगले दिन परिजन थाने पहुंचे और हंगामा करने का प्रयास किया। थानाध्यक्ष मुकेश कुमार मुकेश ने समझदारी से स्थिति संभाली और परिजनों को शांत कराया व उन्होंने आश्वस्त किया कि पुलिस टीम लगातार कमलेश की तलाश में जुटी है।
तकनीकी जांच और लोकेशन से मिला सुराग
पुलिस ने तकनीकी जांच, मोबाइल लोकेशन और संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर मामले की परतें खोलनी शुरू कीं।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कमलेश के फोन की पिछली लोकेशन पटना–बख्तियारपुर की ओर ट्रेस हो रही है। जांच में सामने आया कि कमलेश ने 23–24 नवंबर को सात शादियों में टेंट लगाने के लिए करीब 5 लाख रुपये एडवांस ले रखे थे। इसके अलावा 1.20 लाख रुपये का कर्ज भी था। काम पूरा कर पाने की क्षमता और दबाव से टूटकर कमलेश मोबाइल बंद कर घर से निकल गए।
वे पहले बस स्टैंड, फिर बख्तियारपुर, और वहां से आसनसोल चले गए। तीन दिन वहीं छिपकर रहे, ताकि कोई दबाव न बने।लौटते समय आसनसोल से पटना लौटे और बख्तियारपुर की ओर बढ़ रहे थे, तभी सोहसराय थाना पुलिस ने उन्हें घेराबंदी कर धर दबोचा। छापेमारी टीम में थानाध्यक्ष मुकेश कुमार मुकेश के नेतृत्व में पुलिस बल की टीम लगातार इस मामले में सक्रिय थी और अंततः सफलता मिली।
ये भी पढ़ें- Bihar Crime: बिहार में भीषण सड़क हादसा, पेड़ से टकराई तेज रफ्तार बाइक, दो चचेरे भाईयों की दर्दनाक मौत
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें

