दिल्ली के धौला कुआं के पास सितंबर में हुए BMW सड़क हादसे मामले में पुलिस ने चार्जशीट दायर की है। पटियाला हाउस कोर्ट में दाखिल की गई 400 पेज की चार्जशीट में बड़ा खुलासा किया गया है। इस भयानक हादसे में वित्त मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत सिंह (52) की मौत हुई थी। पुलिस का दावा है कि हादसे के बाद नवजोत कम से कम 15 मिनट तक जिंदा रहे, और समय पर मेडिकल मदद मिलती तो उनकी जान बच सकती थी।
तेज रफ्तार BMW की जोरदार टक्कर
14 सितंबर की दोपहर करीब 1:30 बजे, धौला कुआं के पास यह हादसा हुआ। गुरुग्राम निवासी गगनप्रीत मक्कड़ की BMW तेज स्पीड में मेट्रो पिलर से टकराई, पलटी खाई और नवजोत सिंह की मोटरसाइकल से भी भिड़ गई। इस हादसे में नवजोत और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गए। नवजोत को बाद में वेंकटेश्वरा अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
BMW की स्पीड रिपोर्ट से पता चला कि रिंग रोड पर जहां 50 किमी प्रति घंटे की लिमिट है, कार 100-110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। चार्जशीट में कहा गया है कि इतनी उच्च गति में वाहन को कंट्रोल करना असंभव था और टक्कर की ताकत इतनी जबरदस्त थी कि मजबूत BMW भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
पोस्टमॉर्टम ने किया चौंकाने वाला खुलासा
चार्जशीट में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के हवाले से लिखा गया है कि हादसे के बाद नवजोत सिंह कम से कम 15 मिनट तक जीवित रहे। यह जानकारी पहले कोर्ट में आरोपी को जमानत मिलने के दौरान उठे सवालों का जवाब देती है। उस समय कोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया था।
पास के अस्पताल छोड़कर 20 किमी दूर क्यों ले गए?
पुलिस का आरोप है कि गगनप्रीत मक्कड़ ने नवजोत सिंह और उनकी घायल पत्नी का इलाज जानबूझकर देर से कराया। हादसे के पास दिल्ली कैंट हॉस्पिटल और AIIMS ट्रॉमा सेंटर जैसे बड़े अस्पताल सिर्फ 10-15 मिनट की दूरी पर थे। लेकिन मक्कड़ ने उन्हें 20 किमी दूर GTB नगर के नुलाइफ हॉस्पिटल ले जाने का फैसला किया, जिसमें 23 मिनट लग गए।
नुलाइफ हॉस्पिटल एक छोटा, दो मंजिला नर्सिंग होम है, जहां इमरजेंसी सुविधाएं सीमित हैं। पुलिस को शक है कि यह अस्पताल गगनप्रीत मक्कड़ के दूर के रिश्तेदारों से जुड़ा है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के पिता जाविंदर सिंह नुलाइफ से जुड़ी कंपनियों के डायरेक्टर हैं। चार्जशीट में कहा गया है कि मेडिकल दस्तावेजों में हेरफेर के सबूत जुटाने की कोशिश की गई। इसके अलावा, गगनप्रीत ने मामूली चोटों के बावजूद ICU में भर्ती कराया, ताकि जांच को गुमराह किया जा सके।
एम्बुलेंस की मदद भी ठुकराई
हादसे के तुरंत बाद मौके पर पहुंची एम्बुलेंस के ड्राइवर और पैरामेडिक ने सहायता की पेशकश की, लेकिन आरोपी ने मना कर दिया। पुलिस ने उनका बयान दर्ज किया है और स्पष्ट किया है कि एम्बुलेंस स्टाफ पर कोई दोष नहीं है। जांच के अनुसार, मदद जानबूझकर रोकी गई थी।
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