आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। बस्तर संभाग की लाइफलाइन मानी जाने वाली जगदलपुर–कोंटा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-30) अब 43 साल बाद नए रूप में नजर आ सकती है. लोक निर्माण विभाग की योजना के तहत 36 करोड़ रुपये की लागत से 6.01 किलोमीटर सड़क को 12 मीटर चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है. फिलहाल, यह सड़क महज ढाई मीटर चौड़ी है, जिससे रोज़ाना यातायात और सुरक्षा दोनों पर असर पड़ रहा है.

हालांकि, इस बहुप्रतीक्षित चौड़ीकरण की राह में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया है. उद्यान प्रबंधन ने सड़क चौड़ीकरण के बदले 15.56 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि की मांग की है. दरअसल, वर्ष 1982 में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना के बाद से यह 6.01 किमी हिस्सा पार्क क्षेत्र में आ गया. तभी से इस सड़क पर चौड़ीकरण और मरम्मत पर प्रतिबंध लगा हुआ था. यही वजह है कि दशकों से यह मार्ग बदहाल हालत में है.
स्थिति यह है कि केशलूर से छिंदगढ़ ब्लॉक तक कामानार, तोंगपाल, छिंदगढ़ और पाकेला जैसे इलाकों से गुजरने वाली यह सड़क बुरी तरह जर्जर हो चुकी है, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ सुरक्षा बलों और पर्यटकों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. वहीं दूसरी ओर, बढ़ता ट्रैफिक अब कांगेर घाटी के इकोलॉजिकल बैलेंस के लिए खतरा माना जा रहा है. लगातार बढ़ते वाहनों से वन्यजीवों, जल स्रोतों और भू-गर्भीय गुफाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
इस पूरे मामले पर कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक नवीन कुमार ने स्पष्ट किया है कि एनएच द्वारा 6.01 किमी सड़क चौड़ीकरण के लिए नियमानुसार 15.56 करोड़ रुपये का डिमांड नोट जारी किया गया है. राशि का भुगतान होने के बाद ही उद्यान की ओर से स्वीकृति दी जाएगी. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या क्षतिपूर्ति राशि के भुगतान के बाद 43 साल से इंतज़ार कर रही यह सड़क आखिरकार चौड़ी हो पाएगी या फिर पर्यावरण और विकास के बीच यह टकराव और लंबा खिंचेगा.
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