पटना। जिले के बिहटा स्थित सिकंदरपुर मेगा इंडस्ट्रियल पार्क के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा भुगतान में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 55 लाख रुपए की कथित हेराफेरी के मामले में 10 पदाधिकारी-कर्मियों और एक गैर-लोक सेवक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को प्राप्त 11 किसानों की शिकायतों के आधार पर की गई।
किसानों की शिकायत पर शुरू हुई जांच
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2011-12 के भूमि अधिग्रहण मुआवजे में अनियमित भुगतान किया गया। निगरानी ब्यूरो की जांच में सामने आया कि कई मामलों में दस्तावेजों पर फर्जी भुगतान दर्शाया गया जबकि वास्तविक लाभार्थियों को राशि नहीं मिली। मुआवजा रजिस्टर और भुगतान रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां दर्ज पाई गई।
पूर्व पदाधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस फर्जीवाड़े में तत्कालीन भू-अर्जन अधिकारी, अपर जिला भू-अर्जन अधिकारी, कानूनगो, अमीन, सहायक एवं प्रधान सहायक सहित बिहटा अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारी की संलिप्तता पाई गई है। साथ ही एक गैर-सरकारी व्यक्ति की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है।
और नाम आ सकते हैं सामने
निगरानी ब्यूरो ने कहा है कि अन्य किसानों की शिकायतों की भी विस्तृत जांच की जाएगी। प्रारंभिक जांच में मिले तथ्यों के आधार पर अनुमान है कि जांच आगे बढ़ने पर घोटाले में शामिल और नाम भी उजागर हो सकते हैं।
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