लखनऊ. उत्तर प्रदेश में 23 दिसंबर को हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर चर्चा रुकने का नाम नहीं ले रही है. इस मुद्दे पर नेताओं की बयानबाजी, मुख्य मीडिया में कवरेज और सोशल मीडिया पर पोस्ट्स लगातार जारी हैं. सोशल मीडिया पर इस बैठक को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. अब कुछ ऐसी भी पोस्ट आ रही हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि इस बैठक का उद्देश्य यादव समुदाय के खिलाफ लामबंदी था!
ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर नया एंगल
ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर यह एक बिल्कुल नए तरह का एंगल सामने आ रहा है. कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स ने इस पर पोस्ट किए हैं। भूमि यादव नाम के एक अकाउंट से पोस्ट हुआ- ‘2021 से 2025 तक के घटनाक्रम पर गौर कीजिए। जब-जब चुनाव नज़दीक आते हैं या सत्ता में हिस्सेदारी की बात उठती है, तब-तब ब्राह्मण नेता पार्टी लाइन से ऊपर उठकर एक ही जाजम पर आ बैठते हैं. चाहे दिसंबर 2021 में नड्डा से हुई मुलाकात हो या फिर 23 दिसंबर 2025 को लखनऊ में पी.एन. पाठक के आवास पर हुई 50 विधायकों की बैठक-ये सभी घटनाएँ एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं. इसका उद्देश्य स्पष्ट है कि यादव वर्चस्व को जड़ से समाप्त करना. यादव वंशियों, यह कोई संयोग नहीं है-यह आपके खिलाफ बिछाया गया सुनियोजित राजनीतिक जाल है.’
कुछ इसी तरह का पोस्ट NARAYAN YADAV INDORI नाम के अकाउंट से भी हुआ. पोस्ट कहता है- ‘मंडल आयोग ने पिछड़े वर्गों को जो सामाजिक-राजनीतिक शक्ति दी थी, उसे आज कमंडल और तथाकथित ‘प्रबुद्ध’ सम्मेलनों की आड़ में धीरे-धीरे छीना जा रहा है. 23 दिसंबर की बैठक में शामिल विधायकों के दबाव तंत्र के ज़रिए यह कोशिश की जा रही है कि सरकारी योजनाओं और ठेकों से यादवों की भागीदारी समाप्त कर दी जाए. यह सिर्फ़ राजनीति नहीं है-यह यादव समाज को आर्थिक रूप से हाशिये पर धकेलने और उसके आर्थिक बहिष्कार की एक सुनियोजित साज़िश है. सावधान रहें, सतर्क रहें. संगठित रहें.’
इन दोनों के अलावा भी कई X हैंडल्स ने इस थ्योरी को सही ठहराया है. Anni yadav नाम के एक अकाउंट से भी इसी तरह का पोस्ट हुआ है. पोस्ट के मुताबिक-‘अगर आपको लगता है कि ये बैठकें सामान्य हैं, तो आप गंभीर भूल कर रहे हैं. 2021 की बैठकों के बाद क्या हुआ था- पिछड़ों की हिस्सेदारी क्रमशः कम की गई. अब 2025 की इन बैठकों के बाद भी वही दोहराने की तैयारी है. ठेकों, पट्टों और व्यापार में यादवों को कैसे पीछे धकेला जाए, यही इन तथाकथित “प्रबुद्ध” नेताओं का असली एजेंडा है. यह केवल चर्चा नहीं, आर्थिक और राजनीतिक पुनर्संतुलन के नाम पर एक समुदाय को हाशिये पर डालने की योजना है.’
कई जातीय समूहों की हो चुकी हैं बैठकें
इसी तरह के पोस्ट कई अन्य अकाउंट से भी हुए हैं. बता दें कि इस बैठक पर राज्य बीजेपी पंकज चौधरी सख्त नाराजगी जाहिर कर चुके हैं. ब्राह्मण विधायकों से पहले भी यूपी में कई जातीय बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस बैठक में शामिल कुछ विधायक सफाई भी दे चुके हैं लेकिन चर्चाओं का दौर जारी है. इस बीच यह यादव VS ब्राह्मण की भी नई थ्योरी आ चुकी है.
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