कुमार इंदर, जबलपुर। शहर में हो रहे चौथे वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में इस बार साहित्य, कला और धर्म का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन का प्रमुख आकर्षण सैंड आर्ट होगा, जिसमें रेत से भव्य राम मंदिर को साकार किया गया है न। यह पहली बार होगा जब जबलपुर में राम मंदिर का लाइव सैंड आर्ट निर्माण दर्शकों के सामने किया जाएगा। इस विशेष कलाकृति को ओडिशा के प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट गोपाल सामंत तैयार कर रहे हैं, जिन्हें देश-विदेश में समुद्री तटों पर बनाई गई रेत कलाकृतियों के लिए जाना जाता है। वे 1 जनवरी से मानस भवन स्थित आर्ट गैलरी के मुख्य द्वार पर रेत से राम मंदिर का निर्माण प्रारंभ करेंगे।

पावन कलाकृति के लिए नर्मदा नदी की रेत मंगाई गई

खास बात यह है कि इस पावन कलाकृति के लिए मंडला से पवित्र नर्मदा नदी की रेत विशेष रूप से मंगाई गई है, जिससे इसकी आध्यात्मिक गरिमा और भी बढ़ गई है। सैंड आर्ट का यह प्रदर्शन पूरी तरह जीवंत होगा, यानी दर्शक अपनी आंखों के सामने राम मंदिर को आकार लेते हुए देख सकेंगे। जैसे-जैसे रेत से मंदिर की आकृति उभरेगी, वैसे-वैसे श्रद्धालु और कला प्रेमी उस पल के साक्षी बनेंगे, जब कला, आस्था और आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संगम सामने आएगा। आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन न केवल वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस को खास बनाएगा, बल्कि जबलपुर की सांस्कृतिक पहचान को भी एक नया आयाम देगा।

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रेत कला प्रदर्शन धार्मिक आस्था को मजबूत करेगा

सैंड आर्ट के माध्यम से राम कथा की भावना को जिस तरह सजीव रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, वह निश्चित रूप से शहरवासियों और बाहर से आने वाले अतिथियों के लिए अविस्मरणीय अनुभव होगा। चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में होने वाला यह रेत कला प्रदर्शन न सिर्फ धार्मिक आस्था को मजबूत करेगा, बल्कि जबलपुर को कला और संस्कृति के राष्ट्रीय मानचित्र पर एक अलग पहचान भी दिलाएगा। शहरवासी अब बेसब्री से उस पल का इंतजार कर रहे है।

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