अभय मिश्रा, मऊगंज। मध्य प्रदेश सरकार गोवंशों की सुरक्षा को लेकर कई घोषणाएं कर रही है। लेकिन गौ शाला सरकारी फंड डकार रहे हैं, जिसकी वजह से वहां रहने वाले बेजुबान भूखे-प्यासे मरने को मजबूर हैं। ऐसी ही शर्मनाक तस्वीर मऊगंज के हनुमना से सामने आई है, जहां गौशाला गौवंशों के लिए बंधक गृह बनकर रह गया। यहां भूख-प्यास से तड़पते कई जानवर राशियों से जकड़े पाए गए।
बेजुबानों को अपराधी की तरह बांधकर रखा गया था
मदरावल गौशाला के भीतर इन बेजुबानों को किसी अपराधी की तरह बांधकर रखा गया था। Lalluram.com की टीम जब मौके पर पहुंची, तो वहां दो बैल अत्यंत क्रूर तरीके से रस्सियों में जकड़े हुए मिले। इन्हें न केवल बांधा गया था, बल्कि चारों तरफ से बंद कर दिया गया था। इन्हें न चारा और न पानी दिया गया। भीषण ठंड के बीच बेजुबानों को कैद करना पशु क्रूरता की हदें पार कर दी गई।
क्षमता 250, 500 से अधिक मवेशियों को ठूंस दिया
Lalluram.com ने जब ग्राम पंचायत सरपंच से संपर्क किया, तब उनकी मौजूदगी में इन बंधक गौवंशों को मुक्त कराया गया। गौशाला की क्षमता मात्र 250 की है, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण यहां 500 से अधिक मवेशियों को ठूंस दिया गया है। यह अमानवीय दृश्य पशुपालन विभाग के अधिकारियों की संवेदनहीनता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
गौशाला के पैसे डकार गया विभाग !
सरपंच के मुताबिक, इस गौशाला में 500 गोवंशों के लिए करीब 20 हजार रुपये प्रतिदिन यानी 6 लाख रुपये महीना आवंटित होता है। पूरे मऊगंज जिले में पशुपालन विभाग के पास गौशालाओं के संचालन के लिए हर महीने 3 करोड़ से ज्यादा की राशि आती है। लेकिन मदरावल में चारे के नाम पर धूल और पानी के नाम पर सूखा है। सरकारी तिजोरी से निकला पैसा बेजुबानों के पेट तक पहुंचने के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।
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