जगदलपुर। केके और रायगड़ा रेल लाइन पर चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों की समय-सारिणी में बदलाव किया गया है. ईस्ट कोस्ट रेलवे ने एक जनवरी से नया टाइम टेबल लागू कर दिया है. इसके साथ ही यात्रियों की प्रतिक्रिया सामने आने लगी है.
जगदलपुर से रवाना होने वाली नाइट एक्सप्रेस अब आधा घंटा पहले स्टेशन छोड़ेगी. इसी तरह हीराखंड एक्सप्रेस अब 4:30 की जगह 4 बजे जगदलपुर से रवाना होगी. हावड़ा-जगदलपुर समलेश्वरी एक्सप्रेस अब सुबह 10 की बजाय 10:30 बजे पहुंचेगी. हालांकि, समलेश्वरी एक्सप्रेस के सुबह 5:30 बजे रवाना होने के समय में कोई बदलाव नहीं है. भुवनेश्वर से आने वाली हीराखंड एक्सप्रेस अब एक घंटे विलंब से पहुंचेगी.

किरंदुल-विशाखापटनम नाइट एक्सप्रेस के नए समय को लेकर यात्रियों में नाराजगी है. यात्रियों का कहना है कि पुराने समय से कनेक्टिविटी बेहतर थी. स्थानीय लोगों की मांग है कि समय में फिर से पुनर्विचार किया जाए.
गीदम वेयरहाउस से चावल सप्लाई ठप, पीडीएस व्यवस्था चरमराई
दंतेवाड़ा। गीदम वेयरहाउस में लापरवाही के चलते पीडीएस व्यवस्था संकट में आ गई है. बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों में चावल की आपूर्ति प्रभावित हुई है. सरकार के निर्देश के बावजूद 5 तारीख से वितरण शुरू नहीं हो पाया. जांच में गोदाम में फंगस लगा चावल पाए जाने की पुष्टि हुई है. करीब 30 हजार क्विंटल चावल को साफ कर खपाने की कोशिश की जा रही थी. फिलहाल सफाई कार्य रोक दिया गया है. रायपुर से मार्कफेड की टीम जांच के लिए पहुंचेगी. कलेक्टर ने भी अलग से जांच टीम गठित की है. अब तक यह तय नहीं हो सका कि चावल खाने योग्य है या नहीं. अधिकारियों का दावा है कि वैकल्पिक व्यवस्था से सप्लाई जल्द बहाल होगी.
स्टॉक खत्म होने की कगार पर : गीदम वेयरहाउस से सप्लाई रुकने का असर कुआकोंडा में ज्यादा दिख रहा है. यहां मात्र 80 क्विंटल चावल का स्टॉक बचा हुआ है. शनिवार-रविवार की छुट्टी के कारण सप्लाई पूरी तरह ठप है. अब 5 जनवरी के बाद ही चावल पहुंचने की उम्मीद है. पीडीएस दुकानों तक 10 तारीख तक पहुंचना भी मुश्किल माना जा रहा है. हर महीने 5 तारीख से हितग्राही राशन लेने पहुंचने लगते हैं. दुकानों पर भीड़ और नाराजगी बढ़ रही है. भोगम और चितालंका गोदाम में स्टॉक होने के बावजूद वितरण नहीं हो पा रहा. व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. हितग्राहियों को अस्थायी राहत का इंतजार है.
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बना, इलाज अब भी अधूरा सपना
जगदलपुर। बस्तर के लिए बना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल अब तक शुरू नहीं हो पाया है. अस्पताल संचालन का जिम्मा निजी कंपनी को सौंपा गया है. आरोप है कि कंपनी के पास विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है. इलाज शुरू न होने से मरीजों को बाहर रेफर होना पड़ रहा है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संगठनों में नाराजगी है. मांग उठी है कि कंपनी से किया गया एमओयू रद्द किया जाए. या फिर सरकार खुद अस्पताल का संचालन करे. इलाज की सुविधा शुरू न होना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है. यह अस्पताल पूरे बस्तर के लिए लाइफलाइन माना जाता है. लोग जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं.
धूल से त्रस्त ग्रामीणों का चक्काजाम, हाईवे ठप
कोंडागांव। कुम्हारपारा गांव के ग्रामीणों ने कोंडागांव-नारायणपुर मार्ग पर चक्काजाम किया. नेशनल हाईवे 130-डी पर भारी वाहनों की लंबी कतार लग गई. ग्रामीण सड़क निर्माण की धीमी रफ्तार से परेशान हैं. खनिज परिवहन से उड़ती धूल ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है.
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं. पहले प्रशासन के निर्देश पर पानी का छिड़काव हो रहा था. लेकिन ठेकेदार ने व्यवस्था बंद कर दी. सूचना मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुंचा. ग्रामीणों को आश्वासन देने के बाद जाम समाप्त कराया गया. धूल नियंत्रण को लेकर निगरानी बढ़ाने की बात कही गई.
एचआईवी पीड़िता की पहचान उजागर, अब सीएम स्तर पर जांच
जगदलपुर। मेडिकल कॉलेज में एचआईवी पीड़िता से जुड़ा मामला राज्य स्तर तक पहुंच गया है. पीड़िता की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने जांच के आदेश दिए हैं. जांच की जिम्मेदारी चिकित्सा शिक्षा विभाग को सौंपी गई है. आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने गोपनीयता का उल्लंघन किया. पीड़िता की पहचान गांव तक उजागर कर दी गई. पहले की गई आंतरिक जांच पर भी सवाल उठे हैं.
डॉक्टरों को क्लीन चिट देने का आरोप है. पीड़िता को स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिला. इसके बाद मामला संवैधानिक संस्थाओं तक पहुंचा. अब निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई जा रही है.
पंचायत प्रस्ताव की आड़ में 10 हेक्टेयर जंगल साफ
कोंडागांव। माकड़ी रेंज के हाड़ी गांव में बड़े पैमाने पर जंगल कटाई हुई है. करीब 10 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि से 2500 से ज्यादा पेड़ काटे गए. कटाई पंचायत और ग्रामसभा के प्रस्ताव के आधार पर की गई. तीन दिन तक लगातार कुल्हाड़ी चलती रही. अब वहां सिर्फ ठूंठ और खाली मैदान नजर आ रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें कानून की जानकारी नहीं थी. वन कानूनों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. वन विभाग ने मामले को गंभीर बताया है. पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है. दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है.
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