दिल्ली हिंसा मामले को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है. हिंसा के आरोपी पिछले 6 साल से सलाखों के पीछे हैं. लेकिन रिहाई की मांग कर रहे हैं. शरजील इमाम, उमर खालिद मीरान हैदर ,गुल्फिशा फातिमा, शिफा उर रहमान समेत 7 आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में ज़मानत याचिका भी दाखिल की है, जिनपर लम्बे वक़्त से सुनवाई चल रही है. दिल्ली पुलिस उनकी ज़मानत का विरोध कर रही है. लेकिन बीते 6 साल में ये साबित भी नहीं कर पा रही कि जो आरोप उसकी तरफ से लगाए गए हैं, वो सच है. लेकिन अब तारीख पर तारीख का सिलसिला खत्म हो रहा है.
कोर्ट ने 5 जनवरी को इन ज़मानत याचिकाओं पर फैसला सुनाने की बात कही है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई पहले ही पूरी हो गई थी. कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. .,और 18 दिसंबर तक दोनों पक्षों को अपनी दलीलों के समर्थन में दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए थे.
सुनवाई के दौरान दिल्ली ;पुलिस ने शरजील इमाम के भाषणों के अंश पेश किए थे, जिसपर शरजील ने दलील दी थी कि मैं टेररिस्ट नहीं हूं, मैं इस देश का नागरिक हूं, वहीं उमर खालिद पर दिल्ली पुलिस ने इस हिंसा की साज़िश रचने का जो आरोप लगाया था, उसपर उनके वकील ने तर्क दिया कि, दिल्ली पुलिस ने ठोस सबूत पेश करने के बजाय गवाहों के बयानों पर भरोसा किया है. कोर्ट में दिल्ली पुलिस की दलीलें फेल होती नज़र आई. इस बीच अमेरिका से भी उमर खालिद की रिहाई से आवाज़ उठी.
न्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित मेयर ज़ोहरान ममदानी के साथ 8 अमेरिकी सांसदों ने अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत उमर की रिहाई के लिए चिट्ठी लिखी थी.. जिसके बाद अब कोर्ट ने फैसले के लिए 5 जनवरी की तारीख दी है..अब देखना ये होगा कि कोर्ट का फैसला आरोपियों को राहत देगा… या दिल्ली पुलिस को आरोप साबित करने के लिए एक और मौका दिया जाएगा.
दिल्ली पुलिस ने क्या तर्क दिए?
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह हिंसा अचानक नहीं भड़की थी, बल्कि यह एक पूरी तरह से सुनियोजित और पहले से तय साजिश थी. पुलिस के मुताबिक यह तथाकथित ‘रेजीम चेंज ऑपरेशन’ का हिस्सा था, जिसका मकसद भारत को अस्थिर करना और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाना था.
पुलिस ने कहा कि यह हिंसा जानबूझकर उस समय कराई गई, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर थे, ताकि दुनिया का ध्यान इस पर जाए. पुलिस का यह भी दावा है कि नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA को जानबूझकर एक भड़काऊ मुद्दे के रूप में चुना गया और उसे शांतिपूर्ण विरोध की आड़ में आगे बढ़ाया गया.
दिल्ली पुलिस के अनुसार, गवाहों के बयान, दस्तावेज और तकनीकी सबूत आरोपियों को इस कथित बड़ी साजिश से जोड़ते हैं. पुलिस ने यह भी कहा कि ट्रायल में हुई देरी के लिए आरोपी खुद जिम्मेदार हैं. अब सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों के आधार पर मामले पर विचार कर रहा है.
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