हेमंत शर्मा, देवास/इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में मौतों पर राजनीति अब प्रशासनिक गलती से बड़े बवाल में बदल गई है। कांग्रेस ने जिस भाषा में प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन दिया। वहीं भाषा ज्यों-की-त्यों सरकारी आदेश बन गई और इसी एक चूक ने SDM की कुर्सी ले ली।

कांग्रेस ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान के विरोध में प्रदर्शन की अनुमति मांगते हुए जो आवेदन दिया था, उसी आवेदन को बिना पढ़े-समझे SDM के रीडर ने कॉपी कर लिया और उसे आदेश का रूप दे दिया। हैरानी की बात यह रही कि आदेश में कांग्रेस की राजनीतिक भाषा, आरोप और शब्दावली तक जस की तस शामिल कर दी गई। आदेश में यह तक लिख दिया गया कि भाजपा शासित नगर निगम की ओर से सप्लाई किए गए मल-मूत्र युक्त पानी से 14 लोगों की मौत हुई है और मंत्री के बयान को अमानवीय और निरंकुश बताया गया।

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सम्मान सूचक शब्द भी नहीं

इतना ही नहीं आदेश में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नाम के आगे ‘श्री’ नहीं लगाया गया, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नाम के आगे पूरा सम्मान सूचक ‘श्री’ जोड़ दिया गया। यही नहीं, कांग्रेस के आवेदन में जिस तरह भाजपा सांसदों और विधायकों के घर के सामने “घंटा बजाकर विरोध” की बात लिखी थी, वही लाइन सरकारी आदेश में भी नजर आई। यानी कांग्रेस की अर्जी ही सरकार का आदेश बन गई।

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रीडर को भी हटाया

आदेश सामने आते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए देवास के SDM आनंद मालवीय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही आदेश तैयार करने वाले रीडर पर भी कार्रवाई की गई है।

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