सुशील खरे, रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम नगर के लिए एक दिन ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ। पद्म विभूषण नारायण मूर्ति ने विश्व के पहले निजी ‘सुख शक्ति धाम’ का भव्य लोकार्पण किया। जिसे आत्म-निरीक्षण, मन की शांति और नैतिक जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता इस संपूर्ण अवधारणा के शिल्पकार और प्रेरणास्रोत डॉ. वल्लभ भंसाली (मुंबई) ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में इनाम सेक्युरिटीज के अध्यक्ष नेमीश भाई शाह, इप्का समूह के प्रेमचंद गोधा और कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप मौजूद रहे।
सुख शक्ति धाम आत्म-जागरण का केंद्र
इस दौरान उन्होंने कहा कि समाज में स्थायी परिवर्तन बाहरी व्यवस्था से नहीं, बल्कि व्यक्ति के आत्म-अनुशासन और मूल्यों से आता है। सुख शक्ति धाम आत्म-जागरण का केंद्र है। यह जगह लोगों को भीतर की स्पष्टता, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की ओर प्रेरित करेगा। सुख और शक्ति शब्द ही हमारी गहरी मानवीय आकांक्षाओं का सार है। ये कोई खरीदी जाने वाली वस्तुएं नहीं है। बल्कि ऐसे फल हैं, जिन्हें हमें अपने दैनिक जीवन में स्वयं ही विकसित करना होता है।
वल्लभ भंसाली ने कल्पना साकार करने रतलाम को चुना
उन्होंने कहा कि सबको सुख और शक्ति आधारित एक उज्जवल भविष्य का निर्माण करना चाहिए। सुख शक्ति धाम रतलाम के परिवर्तन की धरा है। वल्लभ भंसाली ने अपनी कल्पना को साकार करने के लिए रतलाम को चुना है और उन्हें उम्मीद है कि रतलाम के सारे युवा इसमें भागीदार बनेंगे। भगवान महावीर हो या बुद्ध, सबने ध्यान किया और समाज को विचार दिया। आर्थिक प्रगति भी असली प्रगति नहीं होती। सत्ता के शीर्ष पर भी शांति और सुख का अनुभव नहीं होता। इसीलिए भारत के मनीषियों ने ध्यान का जो विचार दिया, उससे सुख और शांति दोनों मिलते है। सुख शक्ति धाम रतलाम को नई दिशा दिखाने का काम करेगा।
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