हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नगर निगम, सरकार और मुख्यमंत्री तक पर सीधा और तीखा हमला बोला। उमंग सिंघार ने इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव को खुले मंच से “चिट्ठी वाले महापौर” बताया और आरोप लगाया कि नगर निगम संवेदनहीन हो चुका है, जनप्रतिनिधि जनता की भावनाएं समझने में पूरी तरह विफल हैं। उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि क्या नगर निगम के पार्षद इंदौर को स्वच्छ रख पा रहे हैं? क्या वे इंदौर की जनता की तकलीफ समझ रहे हैं?
इंदौर में “परची वाले महापौर” चल रहे हैं- सिंघार
उन्होंने इंदौर के रहवासी संघों से भी सवाल करते हुए कहा कि शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स कई बार 300 से 350 के पार जा चुका है, जो साफ बताता है कि शहर में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर की जनता ने हमेशा भाजपा को भरपूर समर्थन दिया—विधानसभा सीटें जिताईं, महापौर बनाया—लेकिन बदले में जनता को क्या मिला? उमंग सिंघार ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अब इंदौर में “परची वाले महापौर” चल रहे हैं, जिनमें शहर के प्रति संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती। उमंग सिंघार ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ नेताओं के दफ्तरों में नोट गिनने की मशीनें लगी हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर नोट गिनने की मशीन क्यों लगी है? क्या ठेकेदारों से पैसा आ रहा है? क्या नगर निगम के भुगतान के लिए नोट गिने जा रहे हैं? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह मशीन योग के कारण तो नहीं लगी होगी।
क्या मंत्री मुख्यमंत्री से बड़ा हो गया है?
सिंघार ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर भी तीखा हमला बोला। कहा कि एक वरिष्ठ मंत्री होकर पत्रकारों के लिए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह सरकार की मानसिकता को दिखाता है। उन्होंने सवाल किया कि जब कांग्रेस के धरने की अनुमति के आदेश में शब्द लिखने पर एक एसडीएम सस्पेंड हो सकता है, तो फिर मंत्री के बयान पर कार्रवाई क्यों नहीं? क्या मंत्री मुख्यमंत्री से बड़ा हो गया है? मुख्यमंत्री मोहन यादव इस पर चुप क्यों हैं? मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि वे इंदौर के प्रभारी मंत्री हैं, लेकिन क्या वे कभी आम आदमी की तरह इंदौर की गलियों में घूमे हैं? क्या उन्हें टूटी सड़कें, गंदगी, ट्रैफिक की अव्यवस्था नहीं दिखती? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या मुख्यमंत्री इंदौर सिर्फ कचौरी खाने आते हैं?
क्या कमीशन तय नहीं हो पा रहा था?
उमंग सिंघार ने भागीरथपुरा के मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 2022 में पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित हुआ, 30 जनवरी 2023 को विभाग को भेजा गया, लेकिन टेंडर जारी होने में ढाई साल क्यों लगे? टेंडर जारी होने के बाद भी पांच महीने क्यों बर्बाद हुए? क्या कमीशन तय नहीं हो पा रहा था? उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों ने खुद बताया कि वे महीनों से दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन सरकार ने आंखें मूंदे रखीं। आज जब मौतें हो गईं, तो सरकार मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। उमंग सिंघार ने दावा किया कि उन्होंने खुद अस्पताल जाकर पानी के सैंपल की रिपोर्ट देखी, जिसमें मल से पैदा होने वाले बैक्टीरिया पाए गए। यही पानी लोगों के घरों में सप्लाई किया जा रहा था। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यह सीवेज का पानी कई बोरिंग में भी पहुंच चुका है, जिससे आने वाले समय में किसी भी इलाके में बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
₹2 लाख का मुआवजा पीड़ित परिवार के लिए मजाक है- सिंघार
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ भागीरथपुरा की घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम का फेलियर है। करीब 1500 से 2000 लोग प्रभावित हुए, 17 नागरिकों की मौत हुई, दर्जनों बच्चे अस्पताल में भर्ती रहे—लेकिन सरकार ने आंकड़े छुपाने की कोशिश की। उमंग सिंघार ने साफ कहा कि कुछ अधिकारियों के निलंबन से मामला खत्म नहीं होगा। नगर निगम की फाइलें महीनों तक महापौर के पास पड़ी रहीं—तो क्या उनकी कोई जवाबदारी नहीं बनती? क्या महापौर और मंत्री को इस्तीफा नहीं देना चाहिए? उन्होंने सरकार से मांग की कि पानी का तत्काल सोशल ऑडिट कराया जाए और अगर सरकार ऐसा नहीं करती, तो इंदौर की जनता खुद अपने मोहल्लों और बोरिंग के पानी का सोशल ऑडिट करे, ताकि दोबारा किसी घर का चिराग न बुझे। अंत में उमंग सिंघार ने कहा कि ₹2 लाख का मुआवजा मजाक है। जिन परिवारों ने कमाने वाला सदस्य खोया है, उनकी भरपाई बयानबाजी से नहीं होगी। उन्होंने सरकार से संवेदनशीलता दिखाने और कम से कम एक करोड़ रुपये प्रति परिवार मुआवजा देने की मांग की। उमंग सिंघार ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि आज पूरा देश “स्वच्छ इंदौर” को देख रहा है और सवाल पूछ रहा है। अगर अब भी सरकार नहीं जागी, तो यह त्रासदी किसी और मोहल्ले में दोहराई जा सकती है।
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