ईरान में गिरती करेंसी के खिलाफ गुरुवार रात को भीड़ और उग्र हो गए, जब ईरान से निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने लोगों से घरों से बाहर निकलकर इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ प्रदर्शन करने की अपील की. इसके बाद सरकार ने इंटरनेट और टेलीफोन लाइनें काट दी हैं. ट्रम्प की धमकी के बाद खामेनेई ने बंद किया एयर रूट. लोग सड़कों पर निकलकर ईरान की सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं. ईरान में महंगाई के खिलाफ 13 दिनों से चल रहे प्रदर्शन के बीच गुरुवार रात को हालात और खराब हो गए। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन फैल चुका है। प्रदर्शनकारियों ने सड़कें ब्लॉक कीं, आग लगाई। लोगों “खामेनेई को मौत” और “इस्लामिक रिपब्लिक का अंत हुआ” जैसे नारे लगाए। इस अशांति के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने फिर धमकी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों को मारा गया तो अमेरिका, ईरान पर हमला करेगा।

ईरान की सड़कों पर अब नारे सीधे सत्ता के खिलाफ गूंज रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने खुलकर “डेथ टू डिक्टेटर” के नारे लगाए हैं. बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं और गुस्सा दबाने की बजाय और तेज होता दिख रहा है. जिस पैमाने पर भीड़ सामने आ रही है, उससे साफ संकेत मिल रहा है कि हालात फिलहाल थमने वाले नहीं हैं. खामेनेई शासन के लिए चुनौती हर घंटे बढ़ती जा रही है. मौजूदा हालात यही बता रहे हैं कि आने वाले दिनों में मामला और ज्यादा बिगड़ सकता है और सत्ता पर दबाव और तेज होगा.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर खामेनेई शासन को सख्त चेतावनी दी है. ट्रंप ने साफ कहा है कि अतीत में ईरानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की थी, लेकिन अगर इस बार ऐसा हुआ तो अमेरिका बेहद कड़ी कार्रवाई करेगा. ट्रंप के मुताबिक, फिलहाल बड़े पैमाने पर गोलीबारी की खबरें सामने नहीं आई हैं, लेकिन हालात तेजी से बदल रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा माहौल में ईरान के अंदर शासन को पलटने का जोश और उत्साह बहुत तेज दिखाई दे रहा है. ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब ईरान की सड़कों पर गुस्सा उफान पर है और खामेनेई शासन हर कदम दबाव में उठाता नजर आ रहा है. अमेरिका की इस चेतावनी से तेहरान की बेचैनी और बढ़ना तय माना जा रहा है.

ईरान में 28 दिसंबर को तब प्रदर्शन शुरू हुए थे, जब राजधानी तेहरान में दुकानदारों ने डॉलर की तुलना में ईरानी रियाल की गिरती कीमत को लेकर सड़कों पर नारेबाजी शुरू कर दिए थे. इसके बाद देशभर के कई शहरों में प्रदर्शन शुरू हो गए थे. अब तक प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 39 लोग मारे गए हैं, जबकि 2,260 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है.

ईरान में लगभग दो हफ्तों से चल रहे प्रदर्शन गुरुवार रात को और उग्र हो गए. बताया जा रहा है कि कम से कम 50 शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं. कई शहरों में हिंसक झड़पें हुईं हैं.

ईरान में जब से प्रदर्शन शुरू हुए हैं, तब से ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार धमकी दे चुके हैं. अब ट्रंप ने एक रेडियो के साथ एक इंटरव्यू में कहा, ‘मैंने उन्हें बता दिया है कि अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, जैसा कि वे दंगों के दौरान करते हैं, अगर वे ऐसा करते हैं तो हम उन पर बहुत बड़ी कार्रवाई करेंगे. ईरानी लोगों का समर्थन करते हुए कहा कि अगर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई तो हम छोड़ेंगे नहीं. पिछले हफ्ते भी ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिंसक रूप से मारता है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा.

स्थानीय लोगों ने बताया कि पहलवी की अपील के बाद गुरुवार रात को जैसे ही 8 बजे, लोग सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शनकारियों ने ‘तानाशाही मुर्दाबाद’ और ‘इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाने शुरू कर दिए. दूसरी तरफ शाह के समर्थन में ‘ये आखिरी लड़ाई है, पहलवी वापस आएंगे‘ जैसे नारे लगाए गए.

हालात बेकाबू होते देख ईरानी सरकार ने इंटरनेट सेवा बंद कर दी है और टेलीफोन लाइनें भी काट दी हैं. इंटरनेट मॉनिटरिंग ग्रुप नेटब्लॉक्स ने कहा कि लाइव डेटा से पता चला है कि कई सर्विस प्रोवाइडर्स में कनेक्टिविटी ठप हो गई है, जिससे देश में कई इलाके ऑफलाइन हो गए हैं.

मौजूदा प्रदर्शन आर्थिक संकट को लेकर हो रहे हैं. 28 दिसंबर को तेहरान में प्रदर्शन शुरू हुए थे. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ भी नारेबाजी कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस्लामिक रिपब्लिक के कारण आर्थिक संकट खड़ा हुआ है. दुकानदारों का कहना है कि करंसी इतनी गिर गई है कि एक डॉलर की कीमत 14 लाख ईरानी रियाल हो गई है. 2015 के परमाणु समझौते के समय एक डॉलर 32 हजार रियाल के बराबर था.

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